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Ganesh Ji Puja Aur Upay: वैसे तो हर दिन गणेश जी की पूजा करने का महत्त्व है, लेकिन बुधवार का दिन सर्वोत्तम फलदायी माना गया है। बुधवार को गणेश जी की कृपा पाने के लिए हर व्यक्ति को उपवास करना चाहिए और उनकी पूजा करनी चाहिए।

Ganesh Ji Puja Aur Upay: हिंदू धर्म में भगवान श्रीगणेश को प्रथम पूज्य देव माना गया है। कहते है गणेश जी की पूजा के बाद ही किसी शुभ कार्य की शुरुआत होती है। प्रभु गणेश जी के कई नाम है, जिनमें से एक है विघ्नहर्ता। इस नाम के पीछे वजह है क्योंकि मान्यता है गणेश जी कृपा जिस जीव पर हो जाए, उसके सभी बिगड़े काम बन जाते है। बुधवार का दिन गणेश जी की पूजा के लिए विशेष माना गया है, इसलिए इस दिन गणपति जी की विशेष पूजा होती है।  

वैसे तो हर दिन गणेश जी की पूजा करने का महत्त्व है, लेकिन बुधवार का दिन सर्वोत्तम फलदायी माना गया है। बुधवार को गणेश जी की कृपा पाने के लिए हर व्यक्ति को उपवास करना चाहिए और उनकी पूजा करनी चाहिए। शास्त्रों में भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए कई उपाय बताये गये है, चलिए जानते है- 

गणेशजी को प्रसन्न करने के उपाय

- गणेश जी को दूर्वा प्रिय होती है। इसलिए गणेश पूजा में दूर्वा की 5, 11 या 21 गांठे चढ़ाना शुभ माना गया है। ऐसे में आप भी हर बुधवार गणपति बप्पा के चरणों में दूर्वा घास अर्पित करें। मान्यता है कि, इस उपाय को करने से व्यक्ति के जीवन में चल रही परेशानियां धीरे-धीरे खत्म होने लगती है। 

- प्रत्येक बुधवार को गौरी पुत्र श्री गणेश की पूजा के दौरान चालीसा पाठ अवश्य करना चाहिए। साथ ही इस दिन दान पुण्य करने का भी विशेष फल प्राप्त होता है। बुधवार को हरी मूंग की दाल, अमरूद और तांबे की वस्तुओं का दान करना शुभ माना गया है। इन उपायों को करने से गणेश जी दुखों का हरण करते है। 

- भगवान गणेश जी को मोदक यानी लड्डू काफी प्रिय है। यदि आप अपने जीवन में किसी भी तरह की परेशानी का सामना कर रहे है, तो बुधवार को एकदन्त दयावन्त को लड्डू का भोग अवश्य लगाएं। सच्चे मन और आस्था के साथ हर बुधवार गणेश जी को मोदक चढ़ाने से जल्द मनोकामना पूरी होती है। 

- यदि आप भी अपने जीवन के हर कार्य में बार-बार आ रही बाधाओं का सामना करते है, तो भगवान गणेश की बुधवार को विधिवत पूजा अवश्य करें। साथ ही गणेश जी के मंत्रों का उच्चारण भी करना चाहिए, जो नीचे दिए गए है। इन मंत्रों का सकारात्मक प्रभाव आपके जीवन में बना रहता है। 

गणेश जी के मंत्र

दुर्वा करान्सह रितान मृतन्मंगल प्रदान।
आनीतांस्तव पूजार्थ गृहाण परमेश्वर।।
ॐ एकदन्ताय विद्महे। वक्रतुंडाय धीमहि।
तन्नो बुद्धि प्रचोदयात।।

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