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24 February 2026 Ka Panchang: यहां पढ़ें मंगलवार (24 फरवरी 2026) फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का पंचांग, शुभ मुहूर्त, तिथि शुभ योग; नक्षत्र और राहुकाल।

24 February 2026 Ka Panchang: हिंदू पंचांग के अनुसार, 24 फरवरी 2026, मंगलवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है। यहां जानें ज्योतिषाचार्य डॉक्टर मनीष गौतम जी महाराज से आज के दिन का पंचांग, सूर्य, चंद्रमा की स्थिति और शुभ-अशुभ समय।

तिथि और योग का विवरण
अष्टमी तिथि आज पूरे दिन और पूरी रात के बाद भोर 4 बजकर 52 मिनट तक प्रभावी रहेगी। इस कारण दिनभर दुर्गाष्टमी व्रत और पूजन का विशेष महत्व रहेगा। आज वैधृति योग भी बन रहा है, जो भोर 4 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। वैदिक ज्योतिष में वैधृति योग को सामान्य कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता, लेकिन साधना और जप-तप के लिए यह उपयुक्त हो सकता है। नक्षत्र की बात करें तो आज दोपहर 3 बजकर 7 मिनट तक कृतिका नक्षत्र रहेगा। कृतिका नक्षत्र का संबंध अग्नि तत्व से माना जाता है, जो ऊर्जा, तेज और संकल्प शक्ति का प्रतीक है। इसके बाद रोहिणी नक्षत्र का आरंभ होगा।

शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:23 से 6:12 तक
  • प्रातः सन्ध्या: सुबह 5:47 से 7:01 तक
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:28 से 1:15 तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2:49 से 3:35 तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:40 से 7:05 तक

राहुकाल का समय

  • दिल्ली – दोपहर 3:26 से 4:52 तक
  • मुंबई – दोपहर 3:47 से 5:14 तक
  • चंडीगढ़ – दोपहर 3:27 से 4:52 तक
  • लखनऊ – दोपहर 3:12 से 4:38 तक
  • भोपाल – दोपहर 3:27 से 4:54 तक
  • कोलकाता – दोपहर 2:44 से 4:11 तक
  • अहमदाबाद – दोपहर 3:46 से 5:13 तक
  • चेन्नई – दोपहर 3:19 से 4:48 तक

सूर्योदय और सूर्यास्त

  • सूर्योदय: सुबह 7:01 बजे
  • सूर्यास्त: शाम 6:42 बजे

दुर्गाष्टमी व्रत का महत्व
फाल्गुन शुक्ल अष्टमी को दुर्गाष्टमी का व्रत रखा जाता है। यह दिन मां दुर्गा की आराधना के लिए समर्पित होता है। श्रद्धालु व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करते हैं और शक्ति स्वरूपा देवी से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। विशेष रूप से नारी शक्ति के सम्मान और आध्यात्मिक उन्नति के लिए यह दिन अत्यंत फलदायी माना गया है।

होलाष्टक का आरंभ
24 फरवरी 2026 से होलाष्टक प्रारंभ हो रहे हैं। होलाष्टक, होली से पहले के आठ दिनों की अवधि है, जिसे पारंपरिक रूप से शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के दौरान ग्रहों की स्थिति उग्र मानी जाती है। पहले दिन चंद्रमा की उग्रता का उल्लेख मिलता है। इन दिनों में साधना, जप, तप और आत्मचिंतन को महत्व दिया जाता है।

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