13 March 2026 Ka Panchang: हिंदू पंचांग के अनुसार, 13 मार्च 2026, शुक्रवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि है। यहां जानें ज्योतिषाचार्य डॉक्टर मनीष गौतम जी महाराज से आज के दिन का पंचांग, सूर्य, चंद्रमा की स्थिति और शुभ-अशुभ समय।
तिथि और नक्षत्र का संयोग
पंचांग के अनुसार चैत्र कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि 13 मार्च को पूरे दिन और पूरी रात रहेगी और अगले दिन यानी 14 मार्च की सुबह लगभग 8 बजकर 11 मिनट तक इसका प्रभाव रहेगा। इस दिन पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का भी प्रभाव रहेगा, जो देर रात लगभग 3 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। इसके बाद उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का आरंभ हो जाएगा। वहीं योग की बात करें तो शुक्रवार की सुबह 10 बजकर 32 मिनट तक व्यतिपात योग रहेगा। इसके समाप्त होने के बाद वरियान योग प्रारंभ होगा, जो दिन के बाकी समय में प्रभावी रहेगा।
13 मार्च के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:12 बजे से 06:00 बजे तक
- प्रातः सन्ध्या: सुबह 05:36 बजे से 06:49 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:45 बजे से 07:09 बजे तक
- सायाह्न सन्ध्या: शाम 06:48 बजे से रात 08:00 बजे तक
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
13 मार्च 2026 को सूर्योदय सुबह लगभग 6 बजकर 49 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 48 मिनट के आसपास माना गया है। इसी आधार पर दिनभर के शुभ-अशुभ मुहूर्त निर्धारित किए जाते हैं।
राहुकाल का समय
- मुंबई: सुबह 11:18 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक
- चंडीगढ़: सुबह 11:03 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक
- लखनऊ: सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:16 बजे तक
- भोपाल: सुबह 11:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक
- कोलकाता: सुबह 10:17 बजे से 11:46 बजे तक
- अहमदाबाद: सुबह 11:19 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक
- चेन्नई: सुबह 10:48 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक
दशा माता व्रत का महत्व
चैत्र कृष्ण दशमी के दिन कई क्षेत्रों में दशा माता व्रत रखा जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को करने से घर की नकारात्मक परिस्थितियां दूर होती हैं और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। विशेष रूप से महिलाएं यह व्रत रखती हैं और दशा माता की पूजा करती हैं। इस दिन पूजा के समय महिलाएं गले में दस गांठों वाला धागा धारण करती हैं, जो जीवन की दस दिशाओं में सुरक्षा और शुभता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में आ रही परेशानियां, रोग और आर्थिक बाधाएं दूर होने लगती हैं।
पूजा का शुभ समय
दशा माता व्रत की पूजा आमतौर पर सुबह स्नान के बाद और दिन के शुभ मुहूर्त में की जाती है। ब्रह्म मुहूर्त और सुबह शाम के समय पूजा करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसके अलावा शाम के समय गोधूलि मुहूर्त में भी पूजा-अर्चना की जा सकती है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए लाभकारी माना जाता है।






