क्या फुस्स हो जाएगी ट्रंप की रणनीति: तेल कंपनियों ने वेनेजुएला को 'Uninvestable' बताकर खींचे अपने कदम!
जर्जर बुनियादी ढांचे, राजनीतिक अस्थिरता और कानूनी जोखिमों के कारण वहां उत्पादन फिर से शुरू करना बेहद कठिन है।
तेल कंपनियों ने कहा पैसा किसी ऐसी जगह नहीं लगाएंगे जहां वापसी की कोई उम्मीद न हो।
नई दिल्ली : अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'एनर्जी डोमिनेंस' यानी ऊर्जा प्रभुत्व की योजना को शुरुआती चरण में ही एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा है। अमेरिकी तेल कंपनियों ने ट्रंप प्रशासन के साथ हुई हालिया बैठक में वेनेजुएला के तेल बाजार को 'अछूत' और 'निवेश के अयोग्य' करार दिया है।
दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देश को लेकर कंपनियों की यह दोटूक चेतावनी ट्रंप की भविष्य की उन योजनाओं पर पानी फेर सकती है, जिसमें वेनेजुएला के जरिए वैश्विक तेल कीमतों को नियंत्रित करने की रणनीति देखी जा रही थी।
बुनियादी ढांचे का पूरी तरह ध्वस्त होना
कंपनियों ने स्पष्ट रूप से बताया है कि वेनेजुएला में अब केवल निवेश की कमी नहीं है, बल्कि वहां का पूरा तेल तंत्र ही मर चुका है।
वर्षों से उचित रखरखाव न होने के कारण रिफाइनरियां और ड्रिलिंग मशीनें कबाड़ में तब्दील हो चुकी हैं। कंपनियों का कहना है कि वहां फिर से तेल निकालना शुरू करने का मतलब है शून्य से शुरुआत करना।
इसमें केवल पैसा ही नहीं, बल्कि भारी मात्रा में आधुनिक तकनीक की जरूरत है, जिसे वेनेजुएला की मौजूदा जर्जर व्यवस्था संभालने में सक्षम नहीं है।
प्रतिबंधों और कानूनी अनिश्चितता का जाल
अमेरिकी कंपनियों के हाथ खींचने की एक बड़ी वजह वेनेजुएला पर लगे कड़े प्रतिबंध और वहां की कानूनी अस्पष्टता है।
कंपनियों ने ट्रंप को बताया कि मादुरो शासन के तहत किसी भी समझौते की कोई कानूनी गारंटी नहीं है। कल को अगर सरकार बदलती है या नीतियां पलटती हैं, तो अरबों डॉलर का निवेश एक झटके में डूब सकता है।
कंपनियों के अनुसार, "अनइन्वेस्टेबल" शब्द का इस्तेमाल सिर्फ आर्थिक मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा और साख के जोखिम को देखते हुए किया गया है।
उत्पादन क्षमता का ऐतिहासिक पतन
एक समय था जब वेनेजुएला रोजाना 30 लाख बैरल से ज्यादा तेल उत्पादन करता था, जो अब गिरकर महज कुछ लाख बैरल पर सिमट गया है।
कंपनियों ने डेटा पेश करते हुए बताया कि तेल कुओं में दबाव इतना कम हो चुका है कि अब तेल निकालना पहले जैसा आसान नहीं रहा।
इसके लिए भारी निवेश वाले 'एनहांस्ड ऑयल रिकवरी' प्रोजेक्ट्स की जरूरत है, जिसके लिए वर्तमान माहौल कतई अनुकूल नहीं है।
ट्रंप की रणनीति और कंपनियों का विरोधाभास
डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिका वेनेजुएला जैसे देशों से तेल आयात की निर्भरता को अपनी शर्तों पर मैनेज करे ताकि घरेलू बाजार में तेल की कीमतें गिरें। लेकिन शेवरॉन और अन्य बड़ी कंपनियों का रुख इसके विपरीत है।
उन्होंने साफ कर दिया है कि वे अपने शेयरधारकों का पैसा किसी ऐसी जगह नहीं लगाएंगे जहां वापसी की कोई उम्मीद न हो। यह विरोधाभास ट्रंप प्रशासन के लिए एक कूटनीतिक और आर्थिक सिरदर्द बन सकता है।
पड़ोसी देशों और वैकल्पिक बाजारों की ओर झुकाव
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि यदि अमेरिका वेनेजुएला में विफल रहता है, तो उसका सीधा फायदा रूस और चीन जैसे देशों को हो सकता है, जो पहले से ही वहां पैर जमाने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, अमेरिकी कंपनियों ने सुझाव दिया है कि वेनेजुएला पर ऊर्जा बर्बाद करने के बजाय गुयाना या ब्राजील जैसे उभरते और स्थिर तेल बाजारों पर ध्यान केंद्रित करना अधिक फायदेमंद होगा, जहां निवेश सुरक्षित है और कानूनी प्रक्रिया पारदर्शी है।