भारत-अरब लीग सम्मेलन 2026: दिल्ली में 22 देशों का ऐतिहासिक महामंथन; गाजा पुनर्निर्माण, सुरक्षा और 240 अरब डॉलर के व्यापार पर बना 'महा-प्लान'
दिल्ली में आयोजित भारत-अरब लीग सम्मेलन 2026 गाजा शांति, ऊर्जा सुरक्षा और 240 अरब डॉलर के व्यापार को एक नया आयाम देगा।
भारत और अरब लीग के बीच आर्थिक संबंध वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा की तरह हैं।
नई दिल्ली: एक दशक के लंबे अंतराल के बाद, भारत आज अरब दुनिया के 22 देशों के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों का सबसे बड़ा अध्याय लिख रहा है।
राजधानी दिल्ली में आयोजित 'द्वितीय भारत-अरब विदेश मंत्री सम्मेलन' ने पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीति में भारत के बढ़ते प्रभाव को स्पष्ट कर दिया है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अरब लीग के महासचिव की अध्यक्षता में हो रही यह बैठक भारत की 'एक्ट वेस्ट' नीति और अरब देशों की 'लुक ईस्ट' नीति का सफल संगम है।
1. 10 साल बाद कूटनीतिक 'रीसेट' और ऐतिहासिक वापसी
यह बैठक 2016 में बहरीन में हुई पहली मंत्रिस्तरीय वार्ता के बाद आयोजित होने वाली अपनी तरह की पहली बड़ी कूटनीतिक पहल है।
पिछले 10 वर्षों में भारत और अरब जगत के बीच के रिश्तों ने केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि रक्षा, अंतरिक्ष और उच्च तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी नई ऊंचाइयों को छुआ है।
इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य उन पुराने संस्थागत ढांचों को फिर से जीवित करना है जो पिछले दशक में सुस्त पड़ गए थे, और भविष्य की वैश्विक चुनौतियों के लिए एक साझा रणनीतिक रोडमैप तैयार करना है।
2. गाजा पुनर्निर्माण और 'दो-राष्ट्र' समाधान पर भारत का अटूट संकल्प
सम्मेलन का सबसे संवेदनशील और अहम मुद्दा गाजा पट्टी में शांति बहाली और वहां मलबे में तब्दील हो चुके बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण है।
फिलिस्तीन की विदेश मंत्री डॉ. वर्सेन अघाबेकियन शाहिन ने स्पष्ट किया कि गाजा में तबाही के बाद अब भारत से बड़ी उम्मीदें हैं।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हमेशा 'दो-राष्ट्र समाधान' (Two-State Solution) का समर्थन किया है और इस बैठक में फिलिस्तीन में स्वास्थ्य, शिक्षा और मानवीय सहायता के लिए तकनीकी और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
3. ऊर्जा सुरक्षा और 240 बिलियन डॉलर का व्यापारिक भविष्य
भारत और अरब लीग के बीच आर्थिक संबंध वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा की तरह हैं। भारत अपनी जरूरत का 47% कच्चा तेल और 60% से अधिक गैस इन्हीं देशों से आयात करता है।
वर्तमान में द्विपक्षीय व्यापार 240 बिलियन डॉलर को पार कर गया है। बैठक में इस व्यापारिक संबंध को 'फ्री ट्रेड एग्रीमेंट' (FTA) की दिशा में ले जाने और स्थानीय मुद्राओं (जैसे रुपया और दिरहम) में सीधे व्यापार करने की संभावनाओं पर ठोस चर्चा हुई है, जिससे डॉलर पर निर्भरता कम की जा सके।
4. इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर (IMEC): चीन के BRI का ठोस जवाब
इस सम्मेलन का एक रणनीतिक एजेंडा IMEC कॉरिडोर को पुनर्जीवित करना है। भारत ने 22 अरब देशों के सामने इसे वैश्विक व्यापार का भविष्य बताया है।
यह कॉरिडोर न केवल भारत को यूरोप से जोड़ेगा, बल्कि अरब देशों को रसद और डिजिटल कनेक्टिविटी का एक बड़ा हब बना देगा।
भारत ने स्पष्ट किया है कि यह परियोजना पूरी तरह पारदर्शी है और किसी भी देश की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करती, जो इसे चीन के 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) का एक मजबूत और विश्वसनीय विकल्प बनाती है।
5. 90 लाख भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और 'सोशल सिक्योरिटी' फ्रेमवर्क
अरब देशों में रहने वाले लगभग 90 लाख भारतीय प्रवासी भारत की 'सॉफ्ट पावर' का सबसे बड़ा आधार हैं। इस बैठक में भारत ने प्रवासियों के कानूनी अधिकारों, उनके कार्यस्थल की सुरक्षा और एक सुव्यवस्थित 'सोशल सिक्योरिटी' समझौते पर चर्चा की है।
इसके तहत श्रमिकों की कानूनी सुरक्षा और उनके लिए वीजा प्रक्रियाओं को अधिक सरल बनाने पर सहमति बनी है। यह प्रवासी हर साल अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा भारत भेजते हैं, जो भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
6. समुद्री सुरक्षा और लाल सागर (Red Sea) संकट पर साझा मोर्चा
लाल सागर और अदन की खाड़ी में व्यापारिक जहाजों पर बढ़ते हमलों ने भारत और अरब देशों की चिंता बढ़ा दी है। चूंकि भारत का 60% से अधिक समुद्री व्यापार इसी मार्ग से होता है, इसलिए बैठक में समुद्री डकैती और ड्रोन हमलों के खिलाफ एक साझा 'इंटेलिजेंस शेयरिंग' नेटवर्क बनाने का निर्णय लिया गया है।
भारत इस क्षेत्र में एक 'नेट सुरक्षा प्रदाता' के रूप में अपनी नौसेना के सहयोग को बढ़ाने पर विचार कर रहा है, ताकि व्यापारिक जहाजों की आवाजाही निर्बाध बनी रहे।
7. आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' और फिनटेक सहयोग
सम्मेलन में आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की गई और इसे किसी भी धर्म से न जोड़ने की अपील की गई। भारत और अरब लीग ने 'फिनटेक' के माध्यम से टेरर फंडिंग को रोकने और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।
पाकिस्तान का नाम लिए बिना यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि जो देश आतंक को पनाह देते हैं, उन्हें अंतरराष्ट्रीय समुदाय में जवाबदेह ठहराया जाएगा। अरब देशों का यह रुख भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है।
8. लीबिया और सूडान के साथ रिश्तों में 15 साल बाद आई गरमाहट
इस सम्मेलन की एक बड़ी उपलब्धि लीबिया और सूडान जैसे देशों के साथ रिश्तों का पुनरुद्धार है। लीबिया के किसी मंत्री की 15 वर्षों में यह पहली भारत यात्रा है।
इन देशों में ऊर्जा क्षेत्र, तेल अन्वेषण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भारतीय कंपनियों की भागीदारी दोबारा शुरू करने पर विशेष चर्चा हुई है।
भारत इन संघर्षग्रस्त देशों के विकास में अपना तकनीकी अनुभव साझा करने के लिए तैयार है, जिससे भविष्य में नए व्यापारिक द्वार खुलेंगे।
9. सांस्कृतिक सेतु: सभ्यताओं का मिलन और साझा विरासत
भारत और अरब लीग केवल व्यापारिक साझेदार नहीं हैं, बल्कि उनके बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और भाषाई संबंध हैं। सम्मेलन के दौरान 'भारत-अरब सांस्कृतिक महोत्सव' के आयोजन और विश्वविद्यालयों के बीच छात्र विनिमय कार्यक्रमों को बढ़ाने पर सहमति बनी है। यह 'पीपुल-टू-पीपुल कनेक्ट' ही वह नींव है, जिसके कारण भारतीय संस्कृति की अरब जगत में एक विशेष पहचान बनी हुई है।
10. 'बोर्ड ऑफ पीस' और भारत की मध्यस्थता की भूमिका
भारत वर्तमान में अरब देशों के साथ मिलकर 'बोर्ड ऑफ पीस' (Gaza Peace Plan) के गठन पर चर्चा कर रहा है। अमेरिका और मिस्र जैसे देशों द्वारा समर्थित इस शांति योजना में मानवीय सहायता की बहाली और सार्वजनिक सेवाओं के पुनरुद्धार पर जोर दिया गया है।
भारत की संतुलित विदेश नीति जो इजरायल और अरब देशों दोनों के साथ अच्छे संबंध रखती है, उसे इस संकट में एक विश्वसनीय मध्यस्थ के रूप में स्थापित कर रही है, जिसकी सराहना पूरे अरब लीग ने की है।
11. डिजिटल इकोनॉमी और यूपीआई (UPI) का वैश्विक विस्तार
भारत ने अपनी डिजिटल सफलता को अरब जगत के साथ साझा करने का प्रस्ताव रखा है। कई अरब देशों ने भारत के UPI और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को अपने यहा अपनाने में गहरी रुचि दिखाई है।
इससे न केवल पर्यटन और व्यापार आसान होगा, बल्कि भारतीय प्रवासियों के लिए पैसा भेजना भी बहुत सस्ता, तेज और सुरक्षित हो जाएगा। यह कदम भारत की तकनीकी शक्ति को अरब देशों के वित्तीय ढांचे के साथ जोड़ने का काम करेगा।