कट्टरपंथ की आग में ढाका की धरती: गैरेज में कैद कर हिंदू युवक को आग के हवाले किया, बांग्लादेश में नहीं थम रहा हिंदुओं का कत्लेआम
बांग्लादेश के झिनाइदाह में 23 वर्षीय हिंदू युवक चंचल भौमिक की कट्टरपंथियों ने गैरेज में बंद कर जिंदा जलाकर हत्या कर दी।
बांग्लादेश में चंचल की हत्या 'टारगेटेड वायलेंस' का ताजा उदाहरण है।
नई दिल्ली : बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामला खुलना संभाग के झिनाइदाह जिले का है, जहां 23 वर्षीय हिंदू युवक चंचल भौमिक की बर्बरता से हत्या कर दी गई।
हमलावरों ने न केवल चंचल को निशाना बनाया, बल्कि उसे एक गैरेज के अंदर बंद कर जिंदा जला दिया। इस नृशंस हत्याकांड ने स्थानीय हिंदू समुदाय में डर और दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
तख्तापलट के बाद से बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों की सूची में यह एक और काली कड़ी जुड़ गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
गैरेज में कैद कर आग के हवाले किया
स्थानीय मीडिया और चंचल के परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, हमलावरों ने चंचल को उस समय पकड़ा जब वह अपने काम पर था। उसे जबरन एक ऑटोमोबाइल गैरेज के अंदर धकेला गया और बाहर से ताला लगा दिया गया।
इसके बाद हमलावरों ने गैरेज में ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी। चंचल अंदर से मदद के लिए चिल्लाता रहा, लेकिन आग इतनी भीषण थी कि जब तक लोग उसे बचाने पहुँचते, उसकी जलकर मौत हो चुकी थी।
परिवार का रो-रोकर बुरा हाल, न्याय की गुहार
चंचल भौमिक के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वह अपने परिवार का सहारा था और महज 23 साल की उम्र में उसे धार्मिक नफरत का शिकार बना लिया गया। चंचल के परिजनों ने रोते हुए बताया कि उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी, उसे सिर्फ उसके हिंदू होने की सजा दी गई है।
परिवार ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है, लेकिन मौजूदा अस्थिरता के बीच उन्हें दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीद कम ही नजर आ रही है।
हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती टारगेटेड हिंसा
शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों में हिंदुओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। उनके घरों को जलाना, मंदिरों में तोड़फोड़ करना और अब जिंदा जलाने जैसी घटनाएं आम होती जा रही हैं।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह हिंसा सुनियोजित है और इसका उद्देश्य अल्पसंख्यकों के मन में इतना खौफ पैदा करना है कि वे देश छोड़ने पर मजबूर हो जाएं। चंचल की हत्या इसी 'टारगेटेड वायलेंस' का ताजा उदाहरण है।
प्रशासन की चुप्पी और सुरक्षा पर सवाल
इस जघन्य हत्याकांड के बाद स्थानीय पुलिस और अंतरिम सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी हमलावरों की गिरफ्तारी को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
हिंदू संगठनों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन उपद्रवियों को मौन समर्थन दे रहे हैं, जिसके कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। सुरक्षा के अभाव में हिंदू परिवारों ने अब अपने घरों से बाहर निकलना भी कम कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठ रही आवाज
चंचल भौमिक की जिंदा जलाकर हत्या किए जाने की खबर सोशल मीडिया के जरिए वैश्विक स्तर पर फैल गई है। भारत सहित कई देशों के हिंदू संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने जल्द ही इन कट्टरपंथी तत्वों पर लगाम नहीं लगाई, तो देश में अल्पसंख्यकों का अस्तित्व पूरी तरह खतरे में पड़ जाएगा।