इंडोनेशिया में तबाही का मंजर: वेस्ट जावा में भूस्खलन से 7 की मौत, 82 लोग लापता
इंडोनेशिया के वेस्ट जावा प्रांत में भीषण भूस्खलन से 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 82 लोग अब भी लापता हैं। दर्जनों घर मलबे में दबे, राहत-बचाव अभियान जारी।
इंडोनेशिया के वेस्ट जावा प्रांत में भीषण भूस्खलन से 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 82 लोग अब भी लापता हैं।
Indonesia landslide news: इंडोनेशिया के वेस्ट जावा प्रांत के वेस्ट बांडुंग इलाके में शनिवार तड़के भीषण भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 82 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हादसा उस समय हुआ जब ज्यादातर लोग गहरी नींद में थे।
पहाड़ से उतरा पानी और मिट्टी का सैलाब
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी (BNPB) के अनुसार, यह भूस्खलन पासिरलांगु गांव में रात करीब दो बजे हुआ। माउंट बुरंगरंग की ढलानों से भारी मात्रा में पानी, मिट्टी और मलबा नीचे की ओर बह आया, जिसने करीब 30 घरों को अपनी चपेट में ले लिया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में पूरे इलाके में कीचड़, टूटी दीवारें और तबाह मकान दिखाई दे रहे हैं।
82 लोग अब भी लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन तेज
BNPB के प्रवक्ता अब्दुल मुहारी ने बताया कि लापता लोगों की संख्या काफी ज्यादा है और राहत एवं बचाव कार्यों को तेज कर दिया गया है। लगातार बारिश और अस्थिर जमीन के कारण बचाव दल को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। प्रभावित क्षेत्र लगभग 30 हेक्टेयर में फैला हुआ बताया जा रहा है।
लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया
हालात को देखते हुए प्रशासन ने भूस्खलन संभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए हैं। मौसम विभाग पहले ही वेस्ट जावा में कई दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी जारी कर चुका था।
वेस्ट जावा के कई इलाकों में बाढ़ की भी मार
भूस्खलन के साथ-साथ प्रांत के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति भी बनी हुई है। करावांग जिले के 20 सब-डिवीजनों में नदियों के उफान से जलभराव हो गया है। वहीं पूर्वी जकार्ता में भी सैकड़ों लोग बाढ़ के कारण अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।
बार-बार आपदाओं की जद में इंडोनेशिया
गौरतलब है कि कुछ हफ्ते पहले ही इंडोनेशिया के अलग-अलग प्रांतों में आई बाढ़ और भूस्खलन में एक हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित विकास के कारण देश में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है।