जापान में बड़ा सियासी फैसला: पीएम साने ताकाइची ने 3 महीने में भंग की संसद, 8 फरवरी को होंगे चुनाव
जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने पद संभालने के तीन महीने बाद संसद भंग कर दी। देश में 8 फरवरी 2026 को मध्यावधि चुनाव होंगे। जानिए पूरा मामला।
जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने पद संभालने के तीन महीने बाद संसद भंग कर दी।
Japan Snap Election 2026: जापान की राजनीति में शुक्रवार, 23 जनवरी को बड़ा उलटफेर देखने को मिला। प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने पद संभालने के महज तीन महीने बाद ही संसद को भंग करने का फैसला किया। इसके साथ ही देश में 8 फरवरी 2026 को मध्यावधि चुनाव कराए जाने की घोषणा कर दी गई है।
संसद भंग करने की औपचारिक घोषणा जापान की संसद के स्पीकर फुकुशिरो नुकागा ने की। उन्होंने निचले सदन को भंग करने से जुड़ा आधिकारिक पत्र सदन में पढ़कर सुनाया।
क्यों लिया गया संसद भंग करने का फैसला?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री ताकाइची ने यह कदम अपनी लोकप्रियता का लाभ उठाने के लिए उठाया है। अक्टूबर में प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही उनकी लोकप्रियता लगभग 70 प्रतिशत बताई जा रही है।
उनकी पार्टी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) पिछले कुछ वर्षों में खोया हुआ राजनीतिक आधार फिर से मजबूत करना चाहती है। इसी रणनीति के तहत यह चुनावी फैसला लिया गया है।
465 सदस्यों वाली संसद भंग, 12 दिन का चुनावी अभियान
निचले सदन में कुल 465 सांसद होते हैं। संसद भंग होने के साथ ही अब जापान में 12 दिनों का चुनाव प्रचार अभियान चलेगा।
गौरतलब है कि सत्तारूढ़ गठबंधन—लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) और जापान इनोवेशन पार्टी (JIP)—को 2024 के चुनाव में नुकसान हुआ था। इस समय गठबंधन के पास निचले सदन में बेहद मामूली बहुमत है, जबकि ऊपरी सदन में बहुमत नहीं है।
विपक्ष का विरोध
प्रधानमंत्री के इस कदम को लेकर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष का कहना है कि संसद भंग करना लोकतांत्रिक स्थिरता के लिए सही कदम नहीं है और यह फैसला सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए लिया गया है।
चीन-ताइवान तनाव और अमेरिका का दबाव भी अहम वजह
यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है, जब जापान और चीन के बीच तनाव बढ़ रहा है। हाल ही में साने ताकाइची ने संकेत दिए थे कि यदि चीन ताइवान पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो जापान भी इसमें शामिल हो सकता है। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जापान पर अधिक हथियार खरीदने का दबाव भी जापान की राजनीति को प्रभावित कर रहा है।
कौन हैं साने ताकाइची? जानिए जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री का सफर
साने ताकाइची का जन्म 1961 में नारा प्रांत में हुआ था। उनका राजनीतिक सफर 1980 के दशक में अमेरिका से शुरू हुआ, जहां उन्होंने अमेरिकी सांसद पैट्रिशिया श्रॉडर के वॉशिंगटन कार्यालय में काम किया। अमेरिका में रहते हुए उन्होंने महसूस किया कि जापान की सुरक्षा और पहचान को लेकर वैश्विक नजरिया कमजोर है। इसी सोच ने उन्हें राजनीति में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
लंबा राजनीतिक अनुभव
1992 में उन्होंने पहली बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, हालांकि हार मिली। इसके बाद 1993 में जीत हासिल की और 1996 में LDP में शामिल हुईं। अब तक वह 10 बार संसद सदस्य रह चुकी हैं और आंतरिक मामलों, आर्थिक सुरक्षा, व्यापार व उद्योग जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर से प्रेरित ताकाइची ने तीसरे प्रयास में LDP की कमान संभालते हुए प्रधानमंत्री पद हासिल किया।