Trump vs Fed: जेरोम पॉवेल का बड़ा खुलासा, ट्रंप प्रशासन ने क्रिमिनल केस चलाने की दी थी धमकी
फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने आरोप लगाया है कि ट्रंप प्रशासन ने उन्हें आपराधिक मुकदमे की धमकी दी। इस बयान के बाद अमेरिका में केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता और राजनीतिक दबाव को लेकर बहस तेज हो गई है। जानिए पूरा मामला और इसके दूरगामी असर।
फेड के चेयरमैन जेरोम पॉवेल
(एपी सिंह) वाशिंगटन डीसी। अमेरिका की मौद्रिक नीति से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसने फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फेड के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि ट्रंप प्रशासन ने उन्हें आपराधिक मुकदमे की धमकी दी है। यह धमकी उस गवाही से जुड़ी बताई जा रही है, जो पॉवेल ने पिछले साल कांग्रेस की एक समिति के सामने फेड की इमारत से जुड़े प्रोजेक्ट पर दी थी।
पॉवेल का कहना है कि इस पूरे मामले को एक बहाने के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि केंद्रीय बैंक पर दबाव बढ़ाया जा सके और ब्याज दरों जैसे अहम फैसलों में राजनीतिक दखल मजबूत हो। इस घटनाक्रम का असर तुरंत अमेरिकी राजनीति में भी दिखाई दिया। रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर थॉम टिलिस, जो सीनेट की बैंकिंग समिति के सदस्य हैं, ने इस कदम पर गंभीर चिंता जताई।
थॉम टिलिस ने कहा कि फेड चेयर के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई से न्याय विभाग की निष्पक्षता और भरोसेमंद छवि पर सवाल खड़े होते हैं। टिलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक यह कानूनी विवाद पूरी तरह सुलझ नहीं जाता, तब तक वह फेड से जुड़े किसी भी नए राष्ट्रपति नामांकन का समर्थन नहीं करेंगे, यहां तक कि नए फेड चेयर की नियुक्ति का भी नहीं। पॉवेल ने एक बयान में बताया कि न्याय विभाग ने फेड को ग्रैंड जूरी के समन भेजे हैं और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि वह कानून के शासन और लोकतांत्रिक जवाबदेही में पूरा भरोसा रखते हैं और कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितने ही बड़े पद पर क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं है। हालांकि, साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि मौजूदा कदम को प्रशासन की ओर से लंबे समय से चल रहे दबाव के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जिसमें ब्याज दरों में कटौती और फेड के फैसलों पर ज्यादा नियंत्रण की कोशिशें शामिल हैं।
पॉवेल का साफ आरोप है कि यह मामला न तो उनकी पुरानी गवाही से जुड़ा है और न ही फेड की इमारत के नवीनीकरण से। उनके अनुसार, असली वजह यह है कि फेड ने ब्याज दरों को तय करते समय राष्ट्रपति की पसंद के बजाय अर्थव्यवस्था और जनता के हित को प्राथमिकता दी। उनका मानना है कि केंद्रीय बैंक की यही स्वतंत्र सोच प्रशासन को असहज कर रही है और उसी का नतीजा यह दबाव है। दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे मामले से अनभिज्ञता जताई है।
उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हें न्याय विभाग की इस कार्रवाई की कोई जानकारी नहीं है, लेकिन साथ ही उन्होंने पॉवेल के कामकाज की आलोचना भी की। डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से फेड पर ब्याज दरों में तेज कटौती करने का दबाव डालते रहे हैं और उनका आरोप है कि मौजूदा नीति अर्थव्यवस्था की रफ्तार को रोक रही है। इसके अलावा, ट्रंप फेड गवर्नर लिसा कुक को हटाने की कोशिश भी कर रहे हैं।