ईरानी रियाल हुआ कागज का टुकड़ा: तबाही के कगार पर अर्थव्यवस्था, ट्रंप ने दी तख्तापलट की सीधी चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए सैन्य हस्तक्षेप की चेतावनी दी है, जिससे मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर है।

Updated On 2026-01-11 08:57:00 IST

डोनाल्ड ट्रंप ने खुले तौर पर प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए ईरानी नेतृत्व को सीधी चेतावनी दे डाली।

नई दिल्ली : ईरान के इतिहास में एक बार फिर बदलाव की गूंज सुनाई दे रही है। गिरती अर्थव्यवस्था, बेकाबू महंगाई और अपनी ही सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों ईरानी नागरिकों ने इस्लामिक रिपब्लिक की नींव हिला दी है।

28 दिसंबर से शुरू हुआ यह आंदोलन अब सिर्फ रोटी और रोजगार की मांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक पूर्ण राजनीतिक विद्रोह में बदल चुका है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस हलचल ने तब और जोर पकड़ लिया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुले तौर पर प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए ईरानी नेतृत्व को सीधी चेतावनी दे डाली।

आर्थिक बदहाली से उपजा आक्रोश

इस विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह ईरान का चरमराता आर्थिक ढांचा है। तेहरान के ग्रैंड बाजार से शुरू हुई हड़ताल अब पूरे देश में फैल गई है। खबरों के मुताबिक, ईरानी मुद्रा 'रियाल' इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है, जहां एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 14 लाख रियाल के पार जा चुकी है।

मध्यम वर्ग और व्यापारियों का कहना है कि अब उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं बचा है, जिसके कारण लोग "तानाशाह को मौत" जैसे नारों के साथ सड़कों पर डटे हुए हैं।

डोनाल्ड ट्रंप का 'ट्रुथ सोशल' धमाका और सैन्य चेतावनी

ईरान के भीतर मचे इस घमासान पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है। अपने प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों का उत्साह बढ़ाते हुए लिखा:-

 "ईरान आजादी की ओर देख रहा है, शायद पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। अमेरिका मदद के लिए तैयार है"

इतना ही नहीं, ट्रंप ने ईरानी प्रशासन को सख्त लहजे में आगाह किया है कि अगर उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई या हिंसा की, तो अमेरिका मूकदर्शक नहीं बना रहेगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि "अमेरिका पूरी तरह तैयार है" और जरूरत पड़ने पर कड़ा सैन्य जवाब दिया जा सकता है।

हिंसा, इंटरनेट ब्लैकआउट और गिरफ्तारी का दौर

प्रदर्शनों को कुचलने के लिए ईरानी सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। पूरे देश में इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय कॉल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है ताकि बाहरी दुनिया को जमीनी हकीकत का पता न चल सके।

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में 72 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और 2,300 से अधिक लोगों को जेलों में ठूंस दिया गया है। ईरानी अटॉर्नी जनरल ने प्रदर्शनकारियों को "ईश्वर का शत्रु" घोषित कर दिया है, जिससे उन पर मौत की सजा का खतरा मंडराने लगा है।

मार्को रूबियो का समर्थन और अंतरराष्ट्रीय दबाव

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी इस मुद्दे पर ट्रंप सरकार का रुख साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के "बहादुर लोगों" के साथ खड़ा है और उनकी आजादी की मांग का समर्थन करता है।

वहीं, ईरान के निर्वासित प्रिंस रजा पहलवी ने भी लोगों से सड़कों पर बने रहने की अपील की है, जिससे सरकार विरोधी लहर और तेज हो गई है। खमेनेई सरकार फिलहाल बैकफुट पर नजर आ रही है, लेकिन सेना का संकल्प और सरकार की सख्ती इस संघर्ष को और खूनी बना सकती है।


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