माघ मेला 2026: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने किया संगम स्नान का बहिष्कार, पुलिस की बर्बरता पर मचा बवाल

शंकराचार्य ने दोषी पुलिसकर्मियों के निलंबन और कानूनी कार्रवाई की मांग की है और न्याय मिलने तक संगम में डुबकी न लगाने का संकल्प लिया है।

Updated On 2026-01-18 16:11:00 IST

मेले में मौजूद विभिन्न अखाड़ों के साधु-संतों ने भी इस घटना की निंदा की है।

प्रयागराज : ​प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पुलिस प्रशासन के अमानवीय व्यवहार के विरोध में अपने संगम स्नान का बहिष्कार कर दिया। दरसल शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य की पुलिस ने बर्बरता से पिटाई करी जिसके बाद बात बिगड़ गई

शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि जब तक उनके शिष्य को पीटने वाले पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती, वे पवित्र डुबकी नहीं लगाएंगे।

इस घोषणा के बाद मेला प्रशासन में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में श्रद्धालु और संत उनके समर्थन में उतर आए।

​सुरक्षा के नाम पर संतों के अपमान का आरोप

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि माघ मेले में सुरक्षा के नाम पर संतों और उनके शिष्यों को प्रताड़ित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के सबसे बड़े मेले में अगर एक सन्यासी सुरक्षित नहीं है और पुलिस रक्षक के बजाय भक्षक की भूमिका निभा रही है, तो ऐसे स्नान का कोई औचित्य नहीं है।

उन्होंने इस घटना को पूरे संत समाज और सनातन परंपरा का अपमान करार दिया है।

​अधिकारियों की सफाई और संतों का बढ़ता आक्रोश

मामले को बिगड़ता देख पुलिस के आला अधिकारियों ने सफाई दी कि भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान कुछ कहासुनी हुई थी। हालांकि, वीडियो साक्ष्य सामने होने के कारण पुलिस का बचाव कमजोर पड़ रहा है।

मेले में मौजूद विभिन्न अखाड़ों के साधु-संतों ने भी इस घटना की निंदा की है। संतों का कहना है कि पुलिस को भीड़ प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, न कि उन्हें संतों पर हाथ उठाने की छूट मिलनी चाहिए।

​कार्रवाई की मांग को लेकर अड़े शंकराचार्य

शंकराचार्य ने चेतावनी दी है कि यदि आरोपी पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है। प्रशासन शंकराचार्य को मनाने की कोशिशों में जुटा है, लेकिन वे अपनी मांग पर अडिग हैं कि न्याय के बिना कोई अनुष्ठान संपन्न नहीं होगा।

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