ब्रिटिश नागरिकता का दावा फेल: दोहरी नागरिकता के आरोपों वाली याचिका लखनऊ में हुई खारिज

रायबरेली से लखनऊ ट्रांसफर हुए इस मामले में ब्रिटिश नागरिकता के आरोप लगाए गए थे। कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में इसे रद्द कर दिया, जिससे राहुल गांधी को बड़ी कानूनी राहत मिली है।

Updated On 2026-01-28 22:16:00 IST

कर्नाटक के सामाजिक कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने अपनी याचिका में दावा किया था कि राहुल गांधी के पास भारत के साथ-साथ ब्रिटेन की भी नागरिकता है।

लखनऊ : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और रायबरेली से सांसद राहुल गांधी के खिलाफ दायर 'दोहरी नागरिकता' वाली याचिका को लखनऊ की विशेष एमपी-एमएलए (MP-MLA) कोर्ट ने खारिज कर दिया है। यह मामला लंबे समय से कानूनी और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ था।

पहले इस मामले की सुनवाई रायबरेली में चल रही थी, जिसे सुरक्षा कारणों और निष्पक्षता के आधार पर लखनऊ ट्रांसफर किया गया था। कोर्ट ने साक्ष्यों और कानूनी पहलुओं पर गौर करने के बाद इस अर्जी को विचार योग्य न मानते हुए रद्द कर दिया है।

​रायबरेली से लखनऊ ट्रांसफर हुआ था मामला

​इस केस की शुरुआत रायबरेली की विशेष अदालत में हुई थी, लेकिन याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने वहां अपनी जान को खतरा बताते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

याचिकाकर्ता का तर्क था कि रायबरेली राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र है, जिससे वहां स्थानीय परिस्थितियों के कारण निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं हो पा रही है। इसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे दिसंबर 2025 में लखनऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था।

​याचिकाकर्ता के आरोप और ब्रिटिश नागरिकता का दावा

​कर्नाटक के सामाजिक कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने अपनी याचिका में दावा किया था कि राहुल गांधी के पास भारत के साथ-साथ ब्रिटेन की भी नागरिकता है। उन्होंने कुछ दस्तावेज और ईमेल का हवाला देते हुए आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने एक ब्रिटिश कंपनी 'Backops Limited' के वार्षिक रिटर्न में खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया था।

याचिकाकर्ता की मांग थी कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 84 (A) और नागरिकता अधिनियम के तहत राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता रद्द की जाए और उन्हें चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित किया जाए।

​गृह मंत्रालय की रिपोर्ट और कोर्ट का रुख

​सुनवाई के दौरान अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के रुख पर भी गौर किया। इससे पहले हाई कोर्ट ने भी सरकार से इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। कोर्ट ने पाया कि इस तरह के आरोपों को लेकर पहले भी कई याचिकाएं अलग-अलग स्तरों पर खारिज की जा चुकी हैं।

पर्याप्त और ठोस सबूतों के अभाव में अदालत ने वर्तमान अर्जी को सुनवाई के योग्य नहीं माना और इसे खारिज कर राहुल गांधी को एक बड़ी कानूनी राहत प्रदान की।

​कांग्रेस की प्रतिक्रिया और राजनीतिक मायने

​इस फैसले के बाद कांग्रेस खेमे में खुशी की लहर है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह राहुल गांधी की छवि खराब करने की एक और असफल कोशिश थी। कांग्रेस ने इसे 'सत्य की जीत' बताते हुए कहा कि बार-बार एक ही मुद्दे को उठाकर जनता को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है।

वहीं, बीजेपी समर्थित याचिकाकर्ता ने संकेत दिए हैं कि वे इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

​नागरिकता कानून और भविष्य की स्थिति

​भारत का कानून दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं देता है। यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी दूसरे देश की नागरिकता स्वीकार करता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है।

हालांकि, राहुल गांधी के मामले में पूर्व में भी सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि केवल किसी कंपनी के कागजात में नाम होने से नागरिकता साबित नहीं हो जाती। इस ताजा फैसले के बाद फिलहाल राहुल गांधी की सांसदीय और नागरिकता पर मंडरा रहे खतरे के बादल छंट गए हैं।

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