योगी के सम्मान में छोड़ी कुर्सी: शंकराचार्य की टिप्पणी से आहत डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह का इस्तीफा

जीएसटी विभाग के उपायुक्त प्रशांत सिंह ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा सीएम योगी के खिलाफ की गई टिप्पणियों से आहत होकर इस्तीफा दे दिया है।

Updated On 2026-01-27 15:35:00 IST

इस घटनाक्रम ने राज्य में धर्म, राजनीति और प्रशासन के बीच के उलझे हुए रिश्तों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के जीएसटी विभाग में उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) के पद पर तैनात प्रशांत सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे देकर सबको चौंका दिया है।

प्रशांत सिंह ने अपने इस्तीफे के पीछे ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ की गई हालिया टिप्पणियों को मुख्य कारण बताया है।




अधिकारी का कहना है कि वे मुख्यमंत्री के प्रति की गई अभद्र टिप्पणियों से अत्यंत आहत हैं और ऐसी स्थिति में सरकारी सेवा में बने रहना उनके आत्मसम्मान के विरुद्ध है।

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि हाल ही में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने भी अलग कारणों से इस्तीफा दिया था।

​मुख्यमंत्री के प्रति अटूट निष्ठा और आहत भावनाएं

​प्रशांत सिंह ने अपने त्यागपत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ न केवल प्रदेश के मुखिया हैं, बल्कि एक सन्यासी और करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र भी हैं।

उनके अनुसार, शंकराचार्य जैसे उच्च पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा मुख्यमंत्री के विरुद्ध जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया गया, उसने उनकी भावनाओं को गहरी ठेस पहुँचाई है।

उन्होंने कहा कि एक लोक सेवक के रूप में वे व्यवस्था का हिस्सा हैं, लेकिन एक व्यक्ति के तौर पर वे अपने आदर्श के अपमान को चुपचाप स्वीकार नहीं कर सकते।

​शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बयानों पर जताई आपत्ति

​पिछले कुछ दिनों से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच तनाव की खबरें आ रही थीं। प्रयागराज माघ मेले में हुई घटनाओं के बाद शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री और प्रशासन के रवैये पर तीखे सवाल उठाए थे।

प्रशांत सिंह का मानना है कि इन टिप्पणियों में मर्यादा की सीमा लांघी गई है। उन्होंने अपने इस्तीफे के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि मुख्यमंत्री के विरुद्ध की गई अपमानजनक बातें समाज के एक बड़े वर्ग और शासन में काम करने वाले अधिकारियों को विचलित कर रही हैं।

​प्रशासनिक महकमे और सोशल मीडिया पर चर्चा

​प्रशांत सिंह के इस अचानक उठाए गए कदम ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक प्रशासनिक हलकों में बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर एक वर्ग उनके इस फैसले को 'नैतिक साहस' बता रहा है, जबकि कुछ लोग इसे सरकारी सेवा नियमावली के लिहाज से असामान्य मान रहे हैं।

उपायुक्त स्तर के अधिकारी द्वारा किसी धार्मिक गुरु की टिप्पणी के विरोध में इस्तीफा देना एक नई तरह की मिसाल पेश कर रहा है, जिससे शासन और संत समाज के बीच का विवाद और अधिक गहरा सकता है।

​बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे से तुलना

​प्रशांत सिंह का इस्तीफा बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के ठीक बाद आया है, हालांकि दोनों के कारण अलग-अलग हैं।

जहां अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी कानून और शंकराचार्य के शिष्यों के साथ हुई बदसलूकी के विरोध में पद छोड़ा था, वहीं प्रशांत सिंह ने शंकराचार्य द्वारा मुख्यमंत्री के अपमान को आधार बनाया है।

एक ही हफ्ते के भीतर दो प्रभावशाली अधिकारियों का इस तरह पद छोड़ना उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में उपजे किसी बड़े वैचारिक टकराव की ओर इशारा कर रहा है।

​शासन की प्रतिक्रिया और आगे की राह

​फिलहाल शासन ने प्रशांत सिंह के इस्तीफे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। आमतौर पर ऐसे मामलों में इस्तीफे को तुरंत स्वीकार करने के बजाय अधिकारी को समझाने या मामले की जांच करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।

हालांकि, प्रशांत सिंह अपने फैसले पर अडिग नजर आ रहे हैं। इस घटनाक्रम ने राज्य में धर्म, राजनीति और प्रशासन के बीच के उलझे हुए रिश्तों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

Tags:    

Similar News

बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा: यूजीसी कानून और शंकराचार्य के अपमान को बताया वजह, ठुकरा दी PCS की कुर्सी

मायावती की केंद्र सरकार से बड़ी मांग: 'मान्यवर कांशीराम को तत्काल दिया जाए भारत रत्न'

गणतंत्र दिवस पर सीएम योगी का कड़ा संदेश: 'संविधान से ऊपर कोई नहीं, इसका अनादर देश के सपूतों का अपमान'