मायावती की केंद्र सरकार से बड़ी मांग: 'मान्यवर कांशीराम को तत्काल दिया जाए भारत रत्न'
राजनीतिक गलियारों में मायावती की इस मांग को आगामी चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
मायावती ने कहा कि सरकार को अब और अधिक विलंब न करते हुए इस भूल को सुधारना चाहिए।
लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने केंद्र सरकार से दलितों और पिछड़ों के मसीहा माने जाने वाले मान्यवर कांशीराम को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजने की पुरजोर वकालत की है।
मायावती ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अब इस निर्णय में और देरी नहीं की जानी चाहिए।
उन्होंने तर्क दिया कि कांशीराम जी का योगदान भारतीय राजनीति और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए अतुलनीय है।
देश के करोड़ों लोगों की भावनाओं का सम्मान
मायावती ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि मान्यवर कांशीराम को भारत रत्न देना केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं होगा, बल्कि यह देश के उन करोड़ों दलितों, पिछड़ों और उपेक्षितों की भावनाओं का सम्मान होगा जिन्होंने उनके नेतृत्व में स्वाभिमान से जीना सीखा।
मायावती के अनुसार, कांशीराम जी ने अपना पूरा जीवन 'बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय' के संकल्प को पूरा करने में लगा दिया, इसलिए वे इस सर्वोच्च सम्मान के असली हकदार हैं।
केंद्र सरकार की कार्यशैली पर उठाए सवाल
बसपा प्रमुख ने केंद्र की वर्तमान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को इस मामले में राजनीति से ऊपर उठकर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय-समय पर विभिन्न विभूतियों को भारत रत्न दिया गया है, लेकिन दलित राजनीति के इस महानायक की उपेक्षा करना दुखद है।
मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार को अब और अधिक विलंब न करते हुए आगामी राष्ट्रीय पर्वों से पूर्व इस ऐतिहासिक भूल को सुधारना चाहिए।
चुनावी साल में मांग के गहरे सियासी मायने
राजनीतिक गलियारों में मायावती की इस मांग को आगामी चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। कांशीराम जी के बहाने बसपा अपने कोर वोट बैंक को एकजुट करने और दलित स्वाभिमान के मुद्दे को फिर से हवा देने की कोशिश कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मांग के जरिए मायावती ने केंद्र सरकार को दबाव में लाने का प्रयास किया है, ताकि वंचित समाज के बीच अपनी पकड़ को और मजबूत किया जा सके।