महाशिवरात्रि पर काशी में उमड़ेगा आस्था का जनसैलाब: 26 घंटे लगातार दर्शन देंगे बाबा विश्वनाथ; सुरक्षा के लिए 'स्पर्श' और 'प्रोटोकॉल' पर लगी रोक

वाराणसी में महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ के दरबार में 10 लाख भक्तों के आने की संभावना है। प्रशासन ने 26 घंटे लगातार दर्शन की व्यवस्था की है।

Updated On 2026-02-05 14:34:00 IST

भक्तों की सुविधा और सुगम दर्शन के लिए बाबा के कपाट लगातार 26 घंटे तक खुले रहेंगे।

वाराणसी: महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा के दर्शन के लिए नया रिकॉर्ड बनने जा रहा है। मंदिर प्रशासन को इस बार 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है।

भक्तों की सुविधा और सुगम दर्शन के लिए बाबा के कपाट लगातार 26 घंटे तक खुले रहेंगे, ताकि कोई भी भक्त दर्शन से वंचित न रह सके।

​26 घंटे का 'मैराथन' दर्शन और स्पर्श पर प्रतिबंध

​महाशिवरात्रि के दिन श्रद्धालुओं की भीड़ इतनी अधिक होने की उम्मीद है कि मंदिर प्रशासन ने 'स्पर्श दर्शन' पर पूरी तरह रोक लगा दी है। भक्त केवल गर्भगृह के बाहर से बाबा के दर्शन कर सकेंगे।

झांकी दर्शन की यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि कतार लगातार चलती रहे। इसके साथ ही, वीआईपी और विशिष्ट अतिथियों के लिए लागू होने वाले प्रोटोकॉल दर्शन को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है, जिससे आम श्रद्धालुओं को कम से कम समय में दर्शन मिल सकें।

महाशिवरात्रि: बाबा विश्वनाथ की चार प्रहर की आरती का शेड्यूल

​प्रथम प्रहर की आरती (निशिता काल)

​समय: शाम 7:00 बजे से रात 9:00 बजे तक।

​विवरण: यह महाशिवरात्रि की पूजा की शुरुआत होती है। इसमें बाबा का भव्य श्रृंगार किया जाता है और दूध, दही, घी, शहद व शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक होता है।

​द्वितीय प्रहर की आरती

​समय: रात 11:00 बजे से रात 1:00 बजे तक।

​विवरण: मध्यरात्रि की इस पूजा में विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है। भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए इस दौरान गर्भगृह में केवल पुजारी ही मौजूद रहते हैं, श्रद्धालु बाहर से एलईडी स्क्रीन पर दर्शन कर सकते हैं।

​तृतीय प्रहर की आरती

​समय: रात 2:30 बजे से तड़के 4:30 बजे तक।

​विवरण: ब्रह्म मुहूर्त के करीब होने वाली इस आरती का फल अनंत माना गया है। इस दौरान बाबा का फूलों और भस्म से विशेष श्रृंगार किया जाता है।

​चतुर्थ प्रहर की आरती

​समय: सुबह 5:00 बजे से सुबह 7:00 बजे तक।

​विवरण: यह समापन आरती होती है। इसके बाद बाबा को विशेष भोग लगाया जाता है और मंगला आरती के साथ अगले दिन के दर्शनों का सिलसिला जारी रहता है।

​आरती के दौरान ध्यान देने योग्य बातें

​स्पर्श दर्शन वर्जित: चारों प्रहर की आरती के दौरान आम श्रद्धालुओं के लिए स्पर्श दर्शन पूरी तरह बंद रहेगा।

​झांकी दर्शन: कपाट खुले रहने के कारण कतार में लगे श्रद्धालु चलते हुए बाबा के विग्रह का दूर से (झांकी दर्शन) दीदार कर सकेंगे।

​टिकट और बुकिंग: आरती में शामिल होने के लिए विशेष टिकटों की बुकिंग पहले ही बंद की जा चुकी है, ताकि कतारबद्ध आम भक्तों के दर्शन में बाधा न आए।

​10 लाख श्रद्धालुओं का अनुमान और अभेद्य सुरक्षा

​वाराणसी प्रशासन ने इस बार 10 लाख से अधिक भक्तों के काशी पहुंचने का अनुमान लगाया है। सुरक्षा के लिहाज से पूरे मंदिर परिसर और गंगा घाटों को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है।

सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन और भारी संख्या में पुलिस बल के साथ-साथ एनडीआरएफ की टीमों को भी गंगा में तैनात किया गया है।

श्रद्धालुओं की कतारें दूर-दूर तक न लगें, इसके लिए होल्डिंग एरिया और बैरिकेडिंग की व्यवस्था को और आधुनिक बनाया गया है।

​श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं और बैरिकेडिंग

​धूप और गर्मी से बचाव के लिए कतारों में छाया की व्यवस्था, पेयजल और जगह-जगह प्राथमिक उपचार केंद्रों की व्यवस्था की गई है।

गोदौलिया से लेकर मैदागिन तक के रास्तों पर विशेष बैरिकेडिंग की गई है ताकि यातायात बाधित न हो।

गंगा द्वार से भी श्रद्धालुओं को प्रवेश देने की व्यवस्था है, जिससे रिवर फ्रंट के जरिए आने वाले भक्तों को आसानी हो।

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