UP से 1 लाख से ज्यादा लोग लापता: इलाहाबाद HC ने लिया स्वतः संज्ञान; कोर्ट ने कहा- 'यह स्थिति चिंताजनक, आज फिर होगी सुनवाई'
उत्तर प्रदेश में 1 लाख से ज्यादा लोगों के लापता होने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त। कोर्ट ने जनहित याचिका दर्ज कर सरकार और डीजीपी से जवाब तलब किया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी की है कि यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक बड़ी मानवीय त्रासदी है।
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में लापता लोगों के बढ़ते आंकड़ों ने न्यायपालिका को झकझोर कर रख दिया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश से 1 लाख से अधिक लोग लापता हैं, जिनका कोई सुराग नहीं मिल सका है।
इस गंभीर मुद्दे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खुद संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने और विस्तृत सुनवाई करने का निर्णय लिया है।
हाईकोर्ट का कड़ा रुख: '1 लाख का आंकड़ा डरावना'
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी की है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का लापता होना केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक बड़ी मानवीय त्रासदी है। कोर्ट ने हैरानी जताई कि आधुनिक तकनीक और पुलिस नेटवर्क के बावजूद इतने लोग रिकॉर्ड से बाहर कैसे हैं?
कोर्ट ने इसे नागरिकों के मौलिक अधिकारों और सुरक्षा के उल्लंघन के तौर पर देखा है और अब इस मामले में एक औपचारिक जनहित याचिका दायर की जा रही है।
आज फिर होगी अहम सुनवाई: सरकार से मांगा जवाब
इस मामले में आज फिर से सुनवाई होनी तय हुई है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस महानिदेशक से लापता लोगों की मौजूदा स्थिति, उन्हें ढूंढने के लिए किए गए प्रयासों और भविष्य की कार्ययोजना पर रिपोर्ट मांग सकती है।
कोर्ट यह भी देखना चाहता है कि लापता लोगों में बच्चों और महिलाओं की संख्या कितनी है, क्योंकि यह मानव तस्करी जैसे बड़े अपराधों की ओर इशारा करता है।
एक साल में बढ़े गुमशुदगी के मामले
रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ समय में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने और उनके हल होने के बीच का अंतर बढ़ा है। 1 लाख से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर ने प्रदेश की पुलिसिंग और इन्वेस्टिगेशन सिस्टम पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर असंतोष जाहिर करते हुए यह संज्ञान लिया है ताकि प्रशासन की जवाबदेही तय की जा सके।
लापता बच्चों और महिलाओं पर विशेष चिंता
अदालत ने विशेष रूप से बच्चों और महिलाओं के लापता होने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। अक्सर ऐसे मामलों के पीछे संगठित गिरोहों का हाथ होता है।
हाईकोर्ट इस बात की पड़ताल करना चाहता है कि क्या थानों में गुमशुदगी की रिपोर्ट गंभीरता से लिखी जा रही है और क्या 'ऑपरेशन मुस्कान' जैसे अभियानों का असर धरातल पर दिख रहा है या नहीं।