प्रयागराज माघ मेला: पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर संगम में उमड़ा आस्था का सैलाब, 31 लाख ने किया स्नान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साधु-संतों और कल्पवासियों का अभिनंदन करते हुए सफल प्रबंधन के लिए प्रशासन, पुलिस और सफाईकर्मियों को बधाई दी। इसी के साथ संगम तट पर एक माह का कल्पवास शुरू हो गया है।
मेला क्षेत्र शंखध्वनि, भजन-कीर्तन और 'हर-हर गंगे' के जयघोष से गुंजायमान रहा।
प्रयागराज : तीर्थराज प्रयागराज में माघ मेले का आगाज भक्ति और विश्वास के अद्भुत संगम के साथ हुआ। साल 2026 के प्रथम मुख्य स्नान पर्व 'पौष पूर्णिमा' पर कड़ाके की ठंड को मात देते हुए देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी तट पर आस्था की डुबकी लगाई।
इस पावन दिवस पर शाम 7 बजे तक लगभग 31 लाख लोगों ने संगम में पुण्य अर्जित किया, जिसके साथ ही संगम की रेती पर एक महीने तक चलने वाले कठिन कल्पवास का अनुष्ठान भी आधिकारिक रूप से प्रारंभ हो गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कल्पवासियों और संतों का किया स्वागत
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेले के प्रथम स्नान के सफल आयोजन पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने संगम की पवित्र रेती पर पधारने वाले सभी पूज्य साधु-संतों और कल्पवासियों का हृदय से अभिनंदन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मां गंगा, मां यमुना और मां सरस्वती की असीम कृपा से आज 31 लाख श्रद्धालुओं ने अमृतमयी डुबकी लगाई है। उन्होंने कल्पवासियों की श्रद्धा को नमन करते हुए उनके सुखद और सफल आध्यात्मिक प्रवास की मंगलकामना की।
प्रशासनिक सतर्कता और सफल प्रबंधन की सीएम ने की सराहना
मेले के सुव्यवस्थित आयोजन को लेकर मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन, पुलिस बल और मेला प्रबंधन की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि लाखों की भीड़ का प्रबंधन और सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे टीम ने बखूबी निभाया।
सीएम ने विशेष रूप से स्वच्छताकर्मियों और नाविकों के योगदान को सराहा, जो दिन-रात श्रद्धालुओं की सेवा और सुविधा के लिए तटों पर तैनात रहे। उनकी मुस्तैदी के कारण ही पूरा स्नान पर्व निर्विघ्न संपन्न हुआ।
संगम तट पर कल्पवास और भक्ति का आध्यात्मिक संगम
पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ ही संगम क्षेत्र में तंबुओं का आध्यात्मिक शहर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। हज़ारों कल्पवासियों ने अपने शिविरों में प्रवेश कर लिया है, जहाँ वे एक माह तक भूमि शयन, सात्विक आहार और त्रिकाल स्नान के साथ कठिन व्रत का पालन करेंगे।
पूरा मेला क्षेत्र शंखध्वनि, भजन-कीर्तन और 'हर-हर गंगे' के जयघोष से गुंजायमान रहा, जो भारतीय सनातन संस्कृति की जीवंत झांकी प्रस्तुत कर रहा है।
सुरक्षा और जनसुविधाओं के बीच संपन्न हुआ प्रथम स्नान
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए संगम के विभिन्न घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। जल पुलिस, गोताखोरों की टीम और ड्रोन कैमरों के जरिए चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही थी।
प्रशासन ने ठंड से बचाव के लिए रैन बसेरों और अलाव की व्यवस्था के साथ-साथ चिकित्सा शिविरों को भी अलर्ट मोड पर रखा था। परिवहन विभाग द्वारा अतिरिक्त बसों के संचालन ने दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं की राह आसान बनाई, जिससे प्रथम स्नान पर्व एक सुखद अनुभव के साथ संपन्न हुआ।