New Year 2026: गोविंद देवजी मंदिर में मंगला आरती से हुई नए साल की शुरुआत, उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

नववर्ष 2026 के पहले दिन जयपुर की धार्मिक आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। गुरुवार सुबह ठीक चार बजे जयपुर स्थित आराध्य देव श्री गोविंद देवजी मंदिर में मंगला आरती के साथ नए साल की शुरुआत हुई।

Updated On 2026-01-01 10:19:00 IST

नववर्ष 2026 के पहले दिन जयपुर की धार्मिक आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। गुरुवार सुबह ठीक चार बजे जयपुर स्थित आराध्य देव श्री गोविंद देवजी मंदिर में मंगला आरती के साथ नए साल की शुरुआत हुई। साल के पहले दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर पहुंचने लगे थे और मंदिर के बाहर लंबी कतारें लग गईं।

जयपुर ही नहीं, बल्कि राजस्थान के विभिन्न जिलों और देश-विदेश से आए भक्तों ने ठाकुर जी के दर्शन कर नववर्ष का स्वागत किया। सुबह से मंदिर परिसर “जय श्री राधे” के जयघोष से गूंजता रहा, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

मंदिर प्रशासन ने नववर्ष के अवसर पर उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए दर्शन व्यवस्था को पूरी तरह सुव्यवस्थित रखा। प्रवेश और निकासी मार्ग अलग-अलग बनाए गए थे। पुलिस बल और स्वयंसेवकों की तैनाती कर भीड़ नियंत्रण किया गया, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

नववर्ष पर ठाकुर श्रीजी का विशेष श्रृंगार

नववर्ष के अवसर पर गोविंद देवजी मंदिर में ठाकुर जी का विशेष श्रृंगार किया गया। उन्हें आकर्षक सुनहरी पोशाक धारण कराई गई है। दिनभर अलग-अलग समय पर झांकियों के दर्शन होंगे, जिसमें श्रद्धालु सुमधुर और अलौकिक दर्शन कर सकेंगे। मंगला आरती में शामिल होकर भक्तों ने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

मोती डूंगरी गणेश मंदिर में भी उमड़ी भारी भीड़

जयपुर के प्रथम पूज्य मोती डूंगरी गणेश मंदिर में भी नववर्ष के मौके पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह तड़के से ही गणपति बप्पा के दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गईं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु परिवार सहित मंदिर पहुंचे और नए साल की शुरुआत गणेश जी का आशीर्वाद लेकर की। मंदिर के महंत कैलाश शर्मा ने बताया कि नववर्ष के अवसर पर गणेश जी को विशेष श्रृंगार के साथ सोने का मुकुट धारण कराया गया है। इस बार भोग की परंपरा को भी खास बनाया गया है।

56 प्रकार के लड्डुओं का विशेष भोग

महंत कैलाश शर्मा के अनुसार, इस बार परंपरागत 56 भोग की जगह 56 तरह के लड्डुओं का विशेष भोग लगाया गया है। इसमें बेसन, मोतीचूर, नारियल, रवा-सूजी, आटा, मेवा और मलाई के लड्डुओं के साथ-साथ पिस्ता, सीताफल, वनीला और स्ट्रॉबेरी फ्लेवर के लड्डू शामिल हैं। इसके अलावा चूरमा, मूंग, ड्राई फ्रूट और गुलकंद के लड्डू भी भोग में सजाए गए हैं।

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