Exclusive Interview: “सरकार विधानसभा की कार्यवाही लाइव दिखाने से क्यों डरती है?” नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का तीखा हमला
मध्य प्रदेश की दो साल पुरानी सरकार पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का बड़ा हमला। विधानसभा की लाइव कार्यवाही, बेरोजगारी, किसानों की समस्या, धर्म बनाम विकास की राजनीति और भाजपा सरकार पर तीखे सवाल। पढ़ें हरिभूमि का Exclusive Interview।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से ‘हरिभूमि व आईएनएच’ के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी का ‘सार्थक संवाद
हरिभूमि न्यूज. भोपाल। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का कहना है कि हर तीन चार माह में स्वयं का मूल्यांकन करता हूं। बतौर नेता प्रतिपक्ष हमने हर मुद्दे पर सरकार को घेरा है। सरकार विधानसभा की कार्यवाही को लाइव दिखाने से क्यों डर रही है? विधानसभा की बैठकें कम हो रही हैं।
जनता के हजार सवाल हैं लेकिन सरकार निरुत्तर रहती है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक व्यवस्था से सरकार को दो साल की बधाई। जनता के सवालों के जवाब नहीं दे पाने पर यह सरकार बधाई की पात्र नहीं है। विपक्ष जनता की आवाज है जो सरकार को जगाकर बताती है कि आपके यह काम अच्छे हैं या ये अच्छे नहीं हैं।
हम सरकार को सुझाव भी देते हैं लेकिन सरकार ने इस लोकतांत्रिक व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। उनसे ‘हरिभूमि व आईएनएच’ के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी का सार्थक संवाद।
"विपक्ष सरकार को जगाने का काम करता है, लेकिन आज लोकतांत्रिक व्यवस्था को ही समाप्त किया जा रहा है।"
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वर्तमान सरकार के दो वर्ष पूर्व होने पर आप क्या सरकार को बधाई देंगे?
संवैधानिक व्यवस्था से सरकार को दो साल की बधाई। जनता के सवालों के जवाब नहीं दे पाने पर यह सरकार बधाई की पात्र नहीं है। विपक्ष जनता की आवाज है जो सरकार को जगाकर बताती है कि आपके यह काम अच्छे हैं या ये अच्छे नहीं हैं। हम सरकार को सुझाव भी देते हैं लेकिन सरकार ने इस लोकतांत्रिक व्यवस्था को समाप्त कर दिया है।
सरकार के दो साल के कार्यकाल पर आपका क्या आंकलन है?
भाजपा पूरे देश में संवैधानिक संस्थाओं को समाप्त करने में जुटी हुई है। लोकायुक्त में बिना विपक्ष के नियुक्ति करना। मानवाधिकार आयोग में सरकार अपने लोगों को बैठाना चाहती है। निरंकुश और लोकतंत्र से दूर जाकर भाजपा इस तरह का काम कर रही है। नई व्यवस्था बनाई जा रही है।
सदन में हमने कई मुद्दे उठाए पानी को लेकर, खेती किसानी को लेकर लेकिन सरकार ने झूठे आंकड़े प्रस्तुत करती है। कृिष मंत्री विधानसभा में कहते हैं सबको खाद मिल रही है किसान से पूछो तो वह बताता है उसे खाद नहीं मिल रही। किसानों को 10-12 घंटे बिजली नहीं मिल रही। युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा। सरकार के पोर्टल पर 22 लाख युवा बेरोजगार हैं।
भाजपा सरकार खराब तो उसे वोट इतने क्यों मिल रहे?
पूरे देश में धर्म का नशा चढ़ा हुआ है। भाजपा धर्म के नाम पर चुनाव जीत रही है न कि विकास के नाम पर। विकास के नाम पर यदि चुनाव हो जाएं तो मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि भाजपा विपक्ष में बैठी रहेगी।
2003 के चुनाव में जब दिग्विजय सिंह सत्ता से हटे थे तो वह चुनाव क्या धर्म के नाम पर था?
वक्त के साथ बहुत सी चीजें बदलती हैं। लेकिन भागीरथपुरा सहित इंदौर में कई जगहों पर दूषित पानी का वितरण हो रहा है। वाटर ऑडिट नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेना पड़ा।
आप भागीरथपुरा की घटना के 10 दिन बाद वहां क्यों पहुंचे?
ऐसा नहीं है मेरे जाने से पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर कांग्रेस के पार्षद और कार्यकर्ता वहां पहुंचे। हमें वहां पहुंचने से रोका गया। पीड़ितों की आवाज बनने से रोका गया। एक घंटा मुझे भी लोगों से मिलने नहीं दिया गया। हमें भी बहस करनी पड़ी। सरकार आंकड़ें क्यों छिपा रही है। इंदौरवासियों को सुविधाएं मिले इस पर बात होनी चाहिए।
कांग्रेस ने संवेदना देने के अलावा क्या रोडमैप दिया?
तत्काल हमने कमेटी बनाई। उसने दौरा किया। संवेदनाओं के साथ हम जो हुआ उस अन्याय की बात कर रहे हैं। लोगों के संवैधानिक अधिकारों की बात कर रहे हैं। महापौर ने ढाई साल तक शुद्ध जल की क्यों फाइल रोककर रखी?
आप किसे जिम्मेदार समझ रहे हैं?
मामला कोर्ट में है इसलिए अब कोर्ट तय करेगा। महापौर, कमिश्नर पर जवाबदारी बनती है। सरकार ने पुलिस ने अभी तक केस क्यों नहीं दर्ज किया? इसलिए हमको कोर्ट जाना पड़ा।
नेता प्रतिपक्ष के दायित्व को 2 साल बाद कैसे देखते हैं?
हर तीन चार माह में स्वयं का मूल्यांकन करता हूं। बतौर नेता प्रतिपक्ष हमने हर मुद्दे पर सरकार को घेरा है। सरकार विधानसभा की कार्यवाही को लाइव दिखाने से क्यों डर रही हैं? विधानसभा की बैठकें कम हो रही हैं। जनता के हजार सवाल हैं लेकिन सरकार निरुत्तर रहती है।
क्या आप अपने आप को असहाय महसूस कर रहे हैं?
असहाय तो हम सत्तारूढ़ दल को कर देंगे। हमारे प्रदर्शन को सरकार नौटंकी कहती है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे अटल बिहारी वाजपेयी भी विरोध करते हुए बैलगाड़ी से संसद गए थे। विपक्ष अपना पूरा कर्तव्य निभा रहा है। हम अपना कर्तव्य ईमानदारी से निभा रहे हैं।
शिवराज सिंह चौहान और डॉ. मोहन यादव के काम में क्या अंतर देख पा रहे हैं?
ये भाजपा की आंतरिक व्यवस्था है, आतंरिक लड़ाई है। वैसे दोनों ही हेलिकॉप्टर में घूमने वाले नेता हैं और पीछे से प्रशासिनक रूप से सरकार चलाई जा रही है। सब जानते हैं जहां नेताओं को अनुभव कम होता है वहां प्रशासन ही सरकार चलाता है, अधिकारी मजबूत हो जाते हैं। ये घटनाएं भी इसी का उदाहरण हैं। बयानबाजी करने में महारथी है। कमलनाथ जी का अपना विजन था। उन्होंने हेल्थ ऑडिट की। किसानों का कर्जा माफ किया। विजन सरकार बनाए। सिर्फ लाड़ली बहनाओं को पैसे देने से हर योजना नहीं चल सकती।
बतौर नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ और आप में क्या अंतर है?
यह मूल्यांकन तो प्रदेश की जनता बेहतर ढंग से कर सकती है। कमलनाथ जी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं उन पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
कांग्रेस और भाजपा में किसका समन्वय अपने-अपने अध्यक्ष से ज्यादा अच्छा है?
हम सब पार्टी के बैनर तले संगठनात्मक कार्य करते हैं। मैं और जीतू पटवारी की जोड़ी जय-वीरू की जोड़ी है। इस जोड़ी में जय मैं हूं। मरना मुझे है।
आपके खिलाफ कौन षड़यंत्र कर रहा है?
नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है। हम दोनों भाई हैं। हम दाेनों ही पार्टी के साथ पार्टी की मजबूती के लिए काम कर रहे हैं।
कमलनाथ-दिग्विजय में कौन जय-वीरू?
यह तो उन्हीं से पूछिए। उनसे हमें कोई चुनौती नहीं हैं। वे दोनों भी कांग्रेस परिवार में हैं। हमारी उनसे चर्चाएं होती रहती हैं। सभी एक दूसरे से सलाह करके काम करते हैं।
कांग्रेस संगठन को कैसे मजबूती प्रदान कर रहे हैं?
कांग्रेस संगठन जवाबदारी के साथ जमीन पर काम कर रहा है। हर व्यक्ति अपने स्तर पर जवाबदारी के साथ काम कर रहा है। सभी कांग्रेस पार्टी की रणनीति के तहत काम कर रहे हैं।
कांग्रेस सत्ता में आने से कहां चूक रही है?
हमने आत्ममंथन किया है। हमने दो साल में सबसे पहले कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा किया। हमें जनता में भी उम्मीद की एक किरण नजर आई है कि विपक्ष है जो आप की बात कर रहा है। असला-बारूद बाद की बात पहले तो सैनिकों को खड़ा करना होता है। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को हमने मजबूती के साथ खड़ा किया है।
एसआईआर को लेकर क्या कहेंगे?
देश में भाजपा लोकतंत्र को नष्ट करने की साजिश कर रही है। संवैधानिक संस्थाओं को नियंत्रित किया जा रहा है। लेकिन हम हर लड़ाई लड़ रहे हैं। हमें कानून की सहायता से ही लड़ाई को लड़ना होगा।