तिल चतुर्थी: 7 करोड़ के स्वर्ण आभूषणों से सजे खजराना गणेश, 5 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद
इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में तिल चतुर्थी पर भगवान गणेश 7 करोड़ रुपये के स्वर्ण आभूषणों से सजे नजर आएंगे। तीन दिवसीय मेले में 5 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। जानिए पूजा, भोग और दर्शन व्यवस्था की पूरी जानकारी।
इंदौर। प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में तिल चतुर्थी के अवसर पर आस्था और परंपरा का भव्य उत्सव देखने को मिल रहा है। इस पावन पर्व पर भगवान गणेश अपने पूरे परिवार के साथ विशेष श्रृंगार में श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। भगवान गणेश के साथ भगवान शिव और माता पार्वती को सोने के मुकुट, छत्र और अन्य कीमती आभूषणों से सजाया जाएगा, जिनकी कुल कीमत करीब ₹7 करोड़ से अधिक है। मंगलवार से शुरू हुए इस तीन दिवसीय आयोजन में शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और अन्य राज्यों से 5 लाख से भी अधिक भक्तों के पहुंचने की उम्मीद है।
श्रद्धालुओं की अधिक संख्या को ध्यान में रखते हुए दर्शन की व्यवस्था की गई है, ताकि भीड़ के बावजूद भक्तों को किसी तरह की परेशानी न हो। मंदिर परिसर को फूलों, रंगीन रोशनी और सजावटी लाइटों से सजाया गया है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और उत्सव जैसा दिखाई दे रहा है। परंपरा के अनुसार मेले के पहले दिन भगवान गणेश को तिल और गुड़ से बने 1.25 लाख लड्डुओं का विशेष भोग लगाया जाएगा। इस विशाल भोग की तैयारी के लिए मुख्य रसोइया खेमजी महाराज के नेतृत्व में करीब 40 लोगों की टीम ने दिन-रात मेहनत की है। इसके अलावा 7 जनवरी को गोंद के लड्डुओं और 8 जनवरी को उड़द दाल के लड्डुओं का भोग भी भगवान को अर्पित किया जाएगा।
इस वर्ष तिल चतुर्थी 6 जनवरी, मंगलवार को मनाई जा रही है। इस दिन रात 8 बजकर 54 मिनट पर चंद्रमा का उदय होगा। धार्मिक विश्वास है कि तिल चतुर्थी पर चंद्र दर्शन और पूजा करने से मानसिक तनाव दूर होता है। विशेष रूप से माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए इस दिन व्रत रखती हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को संभालने के लिए मंदिर में चल दर्शन व्यवस्था लागू की गई है, ताकि आरती के समय भी दर्शन बाधित न हों। मेले में झूले, खेल और खाने-पीने के स्टॉल लगाए हैं, जो बच्चों और परिवारों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
(एपी सिंह की रिपोर्ट )