नर्सिंग कॉलेज भर्ती: हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुरुषों को मिली एंट्री, ESB ने जारी किया नया विज्ञापन
हाईकोर्ट ने नर्सिंग कॉलेजों में 100 प्रतिशत महिला आरक्षण की शर्त को हटा दिया है, जिसके बाद अब पुरुष उम्मीदवारों के लिए भी भर्ती का रास्ता साफ हो गया है।
हाईकोर्ट जबलपुर ।
मध्यप्रदेश में नर्सिंग कॉलेज भर्ती को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब खत्म हो गया है। बुधवार, 7 जनवरी को जबलपुर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के बाद बड़ा फैसला सामने आया है। हाईकोर्ट ने नर्सिंग कॉलेजों में 100 प्रतिशत महिला आरक्षण की शर्त को हटा दिया है, जिसके बाद अब पुरुष उम्मीदवारों के लिए भी भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। इस फैसले के तुरंत बाद मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) ने संशोधित विज्ञापन जारी कर दिया है।
दरअसल, इससे पहले जारी विज्ञापन में प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों के कुल 286 अकादमिक पदों 40 एसोसिएट प्रोफेसर, 28 असिस्टेंट प्रोफेसर और 218 सिस्टर ट्यूटर को पूरी तरह महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया गया था। इस निर्णय के खिलाफ कई पात्र पुरुष उम्मीदवारों ने जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा (महिलाओं की नियुक्ति हेतु विशेष उपबंध) नियम 1997 के तहत महिलाओं को अधिकतम 35 प्रतिशत आरक्षण ही दिया जा सकता है। साथ ही, विभागीय भर्ती नियम और इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) के दिशा-निर्देश भी लिंग के आधार पर भेदभाव की अनुमति नहीं देते। याचिका में 100 प्रतिशत महिला आरक्षण को संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 तथा सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी फैसले में तय 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का उल्लंघन बताया गया।
मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की प्रिंसिपल बेंच में जस्टिस विशाल धगट की पीठ के समक्ष हुई। 6 जनवरी की सुनवाई में ESB की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पुरुष उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का निर्णय लिया गया है, लेकिन उस समय लिखित आदेश उपलब्ध नहीं था। चूंकि आवेदन की अंतिम तिथि नजदीक थी, इसलिए कोर्ट ने शासन को एक दिन का समय देते हुए 7 जनवरी को फिर से मामला सूचीबद्ध किया।
बुधवार को हुई सुनवाई के बाद पुरुष उम्मीदवारों की याचिका का निराकरण कर दिया गया और 100 प्रतिशत महिला आरक्षण की शर्त हटाते हुए संशोधित विज्ञापन जारी कर दिया गया। इसके तहत अब पुरुष उम्मीदवार भी इन पदों के लिए 13 जनवरी तक आवेदन कर सकेंगे।
गौरतलब है कि इससे पहले सरकार ने सिस्टर ट्यूटर के 218 पदों को भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर दिया था, लेकिन असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के 68 पदों पर पुरुषों को अपात्र मानते हुए प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही थी। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद सभी पात्र पुरुष उम्मीदवारों को भर्ती में शामिल किया जाएगा।
इस फैसले को नर्सिंग क्षेत्र में समान अवसर की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। लंबे समय से इंतजार कर रहे पुरुष उम्मीदवारों को अब राहत मिली है और वे भी सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में अकादमिक पदों के लिए आवेदन कर सकेंगे।