इंदौर जल संकट: कलेक्टर और महापौर ने आधी रात आरएसएस कार्यालय में किया मंथन, बढ़ी सियासी हलचल
इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद कलेक्टर और महापौर की देर रात RSS कार्यालय में हुई बैठक चर्चा में है। जानिए इस मुलाकात का मतलब, प्रशासनिक दबाव और सियासी आरोपों की पूरी कहानी।
दूषित पानी से हुई मौतों के मामले के बीच इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और महापौर पुष्यमित्र भार्गव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय पहुंचे।
इंदौर। दूषित पानी से हुई मौतों के मामले ने प्रशासन और राजनीति दोनों को गहरे दबाव में ला दिया है। इसी पृष्ठभूमि में बुधवार देर रात इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और महापौर पुष्यमित्र भार्गव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय पहुंचे। बताया जा रहा है कि यह मुलाकात अचानक नहीं थी, बल्कि शहर में बिगड़े हालात और प्रशासनिक चूक को लेकर गंभीर चर्चा के उद्देश्य से की गई। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत के बाद शहर की व्यवस्था और छवि पर सवाल खड़े हो गए हैं, जिसे लेकर यह बैठक अहम मानी जा रही है। यह चर्चा इंदौर के रामबाग क्षेत्र में स्थित आरएसएस के नए कार्यालय ‘सुदर्शन’ में हुई। सूत्रों के अनुसार, आरएसएस के मालवा प्रांत प्रचारक राजमोहन ने कलेक्टर और महापौर से अलग-अलग और संयुक्त रूप से करीब डेढ़ घंटे तक बातचीत की।
बातचीत का केंद्र बिंदु भागीरथपुरा में हुए घटनाक्रम, जल आपूर्ति से जुड़ी लापरवाही और विभागों के बीच समन्वय की कमी रहा। यह भी सामने आया कि बैठक के दौरान स्थिति की गंभीरता को लेकर कड़े शब्दों में बात रखी गई। सूत्रों का कहना है कि चर्चा के दौरान महापौर को हालात संभालने में हुई चूक को लेकर सख्त नाराजगी जताई गई। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों और प्रशासनिक अमले के बीच तालमेल बेहतर बनाया जाए। यह भी कहा गया कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने के बजाय मिलकर तुरंत समस्याओं का समाधान करें, ताकि आम जनता को नुकसान न उठाना पड़े।
बैठक से जुड़ा एक और पहलू चर्चा में रहा। महापौर पुष्यमित्र भार्गव सरकारी वाहन से आरएसएस कार्यालय पहुंचे थे, लेकिन उन्हें वहां छोड़ने के बाद सरकारी गाड़ी वापस लौट गई। बैठक समाप्त होने के बाद महापौर निजी वाहन से वहां से रवाना हुए। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए और आरोप लगाए कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि जवाबदेही से बचने के बजाय संघ कार्यालय जाकर “सलामी” दे रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि प्रशासन को जनता के सामने जवाब देना चाहिए, न कि बंद कमरों में बैठकें करनी चाहिए। बैठक के बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका आरएसएस कार्यालय आना कोई असामान्य बात नहीं है और वे पहले भी यहां आते रहे हैं।
पुष्यमित्र भार्गव ने इसे सामान्य मुलाकात बताया। हालांकि सूत्रों के अनुसार, चर्चा का एक बड़ा मुद्दा इंदौर की छवि को फिर से मजबूत करना था। स्वच्छता और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए पहचाने जाने वाले इंदौर की प्रतिष्ठा को इस घटना से गहरा झटका लगा है। बैठक में यह भी तय किया गया कि भागीरथपुरा इलाके में हालात सुधारना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। सभी प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने, बीमार लोगों के इलाज में किसी तरह की लापरवाही न होने देने और राहत कार्यों की लगातार निगरानी करने पर जोर दिया गया। कुल मिलाकर, यह बैठक प्रशासन पर बढ़ते दबाव और हालात को संभालने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है, जिसने इंदौर की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में नई बहस छेड़ दी है।