राजधानी के पानी में जानलेवा बैक्टीरिया: भोपाल के इन 3 इलाकों में इंदौर जैसा डर्टी वॉटर, BMC ने जारी की सख्त चेतावनी

इंदौर में दूषित पानी से हुई 20 मौतों के बाद अब मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से भी बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। शहर के पेयजल में सीवेज के मल-मूत्र से पैदा होने वाला खतरनाक ई-कोलाई बैक्टीरिया मिलने की पुष्टि हुई है।

Updated On 2026-01-08 12:49:00 IST

राजधानी के पानी में जानलेवा बैक्टीरिया

इंदौर में दूषित पानी से हुई 20 मौतों के बाद अब मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से भी बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। शहर के पेयजल में सीवेज के मल-मूत्र से पैदा होने वाला खतरनाक ई-कोलाई बैक्टीरिया मिलने की पुष्टि हुई है। इसके बाद भोपाल नगर निगम (BMC) ने तीन इलाकों के रहवासियों को पानी पीने और खाना बनाने में इस्तेमाल न करने की सख्त सलाह जारी की है।

दरअसल, इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में पेयजल लाइन में लिकेज के चलते सीवेज का पानी मिल गया था, जिससे बड़ा स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया। इसी घटना को देखते हुए भोपाल नगर निगम ने एहतियातन शहर के संभावित इलाकों से 250 से ज्यादा पानी के सैंपल लिए थे, जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया।

आई जांच रिपोर्ट में तीन स्थानों पर स्थिति गंभीर पाई गई। रिपोर्ट में साफ तौर पर इन इलाकों के पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी सामने आई है। रिपोर्ट सार्वजनिक होते ही प्रशासन हरकत में आया और प्रभावित क्षेत्रों में अलर्ट जारी कर दिया गया।

इन इलाकों में मिला जानलेवा बैक्टीरिया

आदमपुर छावनी: अलग-अलग जल स्रोतों से लिए गए दो सैंपल दूषित पाए गए, दोनों में ई-कोलाई की पुष्टि।

खानू गांव: एक कुएं के पानी में गंभीर संक्रमण मिला।

बाजपेई नगर: एक नलकूप का पानी जांच में दूषित निकला।

इन इलाकों के रहवासियों को फिलहाल ग्राउंड वॉटर का इस्तेमाल बिल्कुल न करने की सलाह दी गई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, ई-कोलाई बैक्टीरिया पाचन तंत्र और किडनी पर सीधा हमला करता है। इससे हैजा, दस्त, उल्टी, पेट में तेज दर्द, डिहाइड्रेशन और यहां तक कि किडनी फेलियर का खतरा भी हो सकता है। इंदौर में हाल ही में हुई मौतों की वजह भी यही बैक्टीरिया बताया गया है।

नगर निगम ने प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक पेयजल आपूर्ति और दूषित जल स्रोतों के शुद्धिकरण की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। हालांकि, इस खुलासे के बाद से इलाके के लोग दहशत में हैं, क्योंकि बड़ी आबादी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भूजल पर ही निर्भर है।

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