इंदौर की 'स्वच्छता' की पोल खुली: पुलिस चौकी के शौचालय से पेयजल लाइन में मिला सीवर, अब तक 15 मौतें, लोगों ने मुआवजा ठुकराया
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में पुलिस चौकी के शौचालय से सीवर का पानी पेयजल लाइन में मिल गया, जिससे 15 लोगों की मौत हो गई और 32 मरीज ICU में भर्ती हैं। लैब रिपोर्ट ने दूषित पानी की पुष्टि की है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
लैब रिपोर्ट से यह पुष्टि हुई है कि इलाके में लोगों के बीमार पड़ने और मौतों की वजह दूषित पेयजल था।
इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर की पहचान वाले इंदौर की यह घटना एक गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आई है। भागीरथपुरा इलाके में फैली डायरिया जैसी जानलेवा बीमारी ने यह साफ कर दिया है कि सिटी प्लानिंग में जरा सी भी चूक बड़ी समस्या पैदा कर सकती है। लैब रिपोर्ट से यह पुष्टि हुई है कि इलाके में लोगों के बीमार पड़ने और मौतों की वजह दूषित पेयजल था, जो सीधे नलों के जरिए घरों तक पहुंच रहा था। इस घटना ने नगर प्रशासन और जल आपूर्ति व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में पता चला है कि भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास मुख्य पेयजल पाइपलाइन में लीकेज था और उसी स्थान पर एक शौचालय बना हुआ था। यही वजह जगह है जहां से सीवेज का गंदा पानी पेयजल लाइन में मिल गया और धीरे-धीरे पूरे इलाके में फैलता चला गया।
अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया, हम भागीरथपुरा में पूरी पेयजल आपूर्ति लाइन की बारीकी से जांच कर रहे हैं ताकि पता चल सके कि कहीं और कोई लीकेज तो नहीं है। नतीजा यह हुआ कि इस जहरीले पानी ने 15 लोगों की जान ले ली और सैकड़ों लोग उल्टी-दस्त से पीड़ित हो गए। इस समय भी 32 लोग आईसीयू में भर्ती हैं। यह स्थिति बताती है कि थोड़ी सी लापरवाही किस तरह बड़े स्वास्थ्य संकट में बदल सकती है। आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति की गंभीरता और भी साफ हो जाती है। अब तक 1400 से ज्यादा लोग इस बीमारी से प्रभावित हो चुके हैं और 15 लोगों की जान चली गई है। बीते आठ दिनों में सैकड़ों मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जिनमें से कई की हालत नाजुक बनी हुई है।
यह सिर्फ एक मोहल्ले की समस्या नहीं रही, बल्कि पूरे नगरीय प्रबंधन के लिए एक सबक है कि सीवर लाइनें और पेयजल लाइनें पास-पास नहीं होनी चाहिए। प्रशासन ने स्थिति को काबू में लाने के लिए पाइपलाइन की जांच शुरू कर दी है और प्रभावित इलाके में फिलहाल साफ पानी की आपूर्ति बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है। लोगों को एहतियातन पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई है। साथ ही पानी के नए सैंपल लेकर दोबारा जांच कराई जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अब हो रही सप्लाई सुरक्षित है या नहीं। इस घटना से लोगों का भरोसा नगरीय प्रबंधन पर से उठ गया है। गुरुवार को जब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इस त्रासदी की वजह से मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपए आर्थिक सहायता देने पहुंचे तो लोगों ने उसे लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने सवाल किया कि क्या इस राशि से उनके बिछड़े परिजन वापस आ सकते हैं।
(एपी सिंह की रिपोर्ट)