इंदौर में जहरीले पानी का तांडव: भागीरथपुरा में दर्जनों मौतें, 338 नए मरीज मिलने से हड़कंप

स्वास्थ्य सर्वे में 338 नए मरीज मिले हैं, जिनमें से 32 की हालत गंभीर होने पर उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया है।

Updated On 2026-01-02 11:38:00 IST

बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया है।

इंदौर : शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के सेवन से हुई दर्जनों मौतों ने पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। नए साल की शुरुआत इंदौर के लिए बेहद खौफनाक रही, जहां एक तरफ लोग जश्न मना रहे थे, वहीं दूसरी तरफ सैकड़ों लोग अस्पतालों में जीवन और मौत की जंग लड़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए बड़े स्तर के सर्वे में 338 नए मरीज मिलने और 32 लोगों के आईसीयू में होने से स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।

24 घंटे में शिकायतों का अंबार: जोन-5 बना हॉटस्पॉट

भागीरथपुरा की त्रासदी के बाद नगर निगम के अधिकारी अब जल संबंधी शिकायतों को लेकर सक्रिय नजर आ रहे हैं। साल के पहले ही दिन दोपहर 2:30 बजे तक 'इंदौर-311' हेल्पलाइन पर जल संकट और दूषित पानी से जुड़ी 206 नई शिकायतें दर्ज की गईं।

आंकड़ों के मुताबिक, सबसे बदतर स्थिति जोन नंबर 5 की है, जहाँ से सर्वाधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं। प्रशासन अब इन क्षेत्रों में पाइपलाइन लीकेज और सीवेज मिक्सिंग की जांच में जुट गया है।

मेगा हेल्थ सर्वे: 1714 घरों की जांच और 338 नए संक्रमित

गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने प्रभावित इलाकों में सघन सर्वे अभियान चलाया। इस दौरान कुल 1,714 घरों का दौरा किया गया, जिसमें लगभग 8,571 लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई। इस जांच में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जहा एक ही दिन में 338 नए मरीज मिले हैं।

इन सभी को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में मरीजों का मिलना क्षेत्र में फैले संक्रमण की गंभीरता को दर्शाता है।

अस्पतालों के हालात: 201 मरीज भर्ती, 32 की हालत नाजुक

संक्रमण की चपेट में आए लोगों के कारण शहर के अस्पतालों के बेड भर चुके हैं। अब तक कुल 272 मरीजों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

राहत की बात यह है कि उपचार के बाद 71 मरीजों को डिस्चार्ज कर घर भेज दिया गया है, लेकिन वर्तमान में 201 मरीज अब भी अस्पताल में उपचाराधीन हैं। इनमें से 32 मरीजों की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है, जिन्हें आईसीयू (ICU) में रखा गया है।

नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

भागीरथपुरा में दर्जनों मौतों के बाद निगम प्रशासन की भारी किरकिरी हो रही है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि दूषित पानी की शिकायतें लंबे समय से की जा रही थीं, लेकिन अधिकारियों ने समय रहते ध्यान नहीं दिया।

अब जब मौतें होने लगीं, तब जाकर हेल्पलाइन नंबरों और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई शुरू की गई है। शहर की पेयजल वितरण व्यवस्था में तकनीकी खामियों को इस त्रासदी का मुख्य कारण माना जा रहा है।

सुरक्षा उपाय और स्वास्थ्य विभाग की सलाह

बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया है। लोगों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे पानी को उबालकर और छानकर ही पिएं।

निगम की टीमें अब टैंकरों के माध्यम से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति करने का प्रयास कर रही हैं और पानी की टंकियों की सफाई के साथ-साथ ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव किया जा रहा है ताकि संक्रमण को और फैलने से रोका जा सके।


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