क्लीन सिटी' इंदौर में 'जहरीले' पानी का तांडव: 14 की मौत, सैकड़ों बीमार और प्रशासनिक दावों पर सवाल
इंदौर के भागीरथपुरा में पीने के पानी की लाइन में सीवेज का गंदा पानी मिलने से अब तक 14 लोगों की मौत हो गई और 160 से ज्यादा लोग बीमार हैं।
राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।
इंदौर : देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर का भागीरथपुरा इलाका इस वक्त एक बड़ी मानवीय त्रासदी का केंद्र बन गया है।
पाइपलाइन में सीवेज का गंदा पानी मिलने से फैले संक्रमण ने अब तक 14 लोगों की जान ले ली है, जबकि 160 से अधिक लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।
10 साल की मन्नत के बाद पैदा हुए 6 महीने के मासूम अव्यान की मौत ने इस घटना को और भी हृदयविदारक बना दिया है। फिलहाल पूरा इलाका दहशत में है और प्रशासन मौतों के आंकड़ों को लेकर अपनी सफाई देने में जुटा है।
मौतों के आंकड़ों पर उलझा प्रशासन और सरकार
इस त्रासदी में सबसे बड़ा विवाद मौतों की वास्तविक संख्या को लेकर खड़ा हो गया है। स्थानीय निवासियों और परिजनों का स्पष्ट दावा है कि अब तक 14 लोग जान गंवा चुके हैं, लेकिन सरकारी तंत्र में भारी विरोधाभास है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जहां केवल 4 मौतों की पुष्टि की है, वहीं शहर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव 7 मौतों की बात कह रहे हैं। आंकड़ों का यह खेल पीड़ित परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा साबित हो रहा है।
मासूमों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा कहर
दूषित पानी का सबसे घातक असर बच्चों और बुजुर्गों पर देखने को मिल रहा है। अस्पतालों में भर्ती 162 मरीजों में से बड़ी संख्या इन्हीं की है।
परिजनों का आरोप है कि नल से आने वाले पानी में गंदी बदबू आ रही थी, लेकिन जब तक वे समझ पाते, संक्रमण पूरे परिवार में फैल चुका था। 6 महीने के मासूम अव्यान की मौत ने व्यवस्था की उस पोल को खोल दिया है, जहा स्वच्छ जल जैसे बुनियादी हक के बदले मौत मिल रही है।
पाइपलाइन में सीवेज रिसाव: सिस्टम की बड़ी लापरवाही
शुरुआती जांच में यह खौफनाक सच सामने आया है कि भागीरथपुरा में पीने के पानी की मुख्य पाइपलाइन के पास एक नवनिर्मित शौचालय का वेस्ट मिल रहा था। इसी लीकेज के कारण पूरे इलाके की वाटर सप्लाई 'जहरीली' हो गई।
'क्लीन सिटी' का तमगा रखने वाले इंदौर में इतनी बड़ी तकनीकी लापरवाही ने नगर निगम की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
अधिकारियों पर गाज और आर्थिक सहायता की घोषणा
मामले के तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर नगर निगम के जोनल अधिकारी और सहायक इंजीनियर को निलंबित कर दिया गया है। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।
हालांकि, स्थानीय जनता का आक्रोश कम नहीं हो रहा है; उनका कहना है कि चंद रुपयों और निलंबन से उन घरों की भरपाई नहीं हो सकती जिन्होंने अपने चिराग खो दिए हैं।
ग्राउंड जीरो पर राहत कार्य और वर्तमान स्थिति
वर्तमान में भागीरथपुरा और आसपास के क्षेत्रों में नगर निगम की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं। प्रभावित इलाकों में पुरानी पाइपलाइनों को बंद कर दिया गया है और टैंकरों के जरिए पानी की सप्लाई की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को पानी उबालकर पीने की सख्त हिदायत दी है, लेकिन अस्पतालों में बढ़ती भीड़ अब भी चिंता का विषय बनी हुई है।