कश्मीरी युवकों के साथ बदसलूकी: यमुनानगर में 'जय श्री राम' और 'भारत माता की जय' बोलने का दबाव डाला
यह घटना पिछले 25 दिनों के भीतर हरियाणा में कश्मीरी व्यापारियों के साथ हुई तीसरी घटना है। इससे पहले फतेहाबाद में एक विक्रेता का गला पकड़ने और कैथल में वेंडरों को अपशब्द कहकर भगाने के मामले भी सामने आ चुके हैं।
कश्मीरी युवक को भारत माता की जय बोलने के लिए विवश करते युवक।
हरियाणा के यमुनानगर जिले से एक विचलित करने वाली घटना सामने आई है, जहां अपनी रोजी-रोटी के लिए घूम-घूम कर कपड़े बेचने वाले दो कश्मीरी युवकों को कुछ स्थानीय लोगों ने घेर लिया। आरोप है कि इन युवकों पर विशेष धार्मिक नारे लगाने के लिए दबाव बनाया गया और इनकार करने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। इस पूरी घटना का एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव और चर्चा का माहौल है।
व्यापार करने आए युवकों को दी धमकी
जानकारी के मुताबिक नजीर अहमद ख्वाजा और इम्तियाज अहमद लोन नामक दो कश्मीरी युवक सोमवार को कलावड़ गांव के आसपास शॉल और चादरें बेचने के कार्य में जुटे थे। इसी दौरान कुछ स्थानीय युवकों ने उन्हें रोक लिया और उनकी राष्ट्रीयता पर सवाल उठाकर उन्हें 'पाकिस्तानी' कहना शुरू कर दिया।
सामने आए वीडियो में आरोपी युवक आक्रामक लहजे में कश्मीरी वेंडरों को डराकर कह रहे हैं कि यदि उन्होंने उनके अनुसार नारे नहीं लगाए तो उन्हें गांव में दोबारा घुसने नहीं दिया जाएगा। वीडियो में एक युवक बोलता है कि अगर तुम हमारे साथ नहीं चल सकते तो यहां से चले जाओ, वर्ना तुम्हारे कपड़े भी छीन लिए जाएंगे।
धर्म और प्रार्थना हर व्यक्ति का निजी मामला
जब स्थानीय युवकों ने कश्मीरी वेंडरों पर 'जय श्री राम' और 'भारत माता की जय' बोलने का दबाव डाला तो कश्मीरी युवक ने अपना पक्ष रखा। उसने कहा कि धर्म और प्रार्थना हर व्यक्ति का निजी मामला है। हम भारतीय हैं और अपने देश से प्यार करते हैं, लेकिन नारे लगाने के लिए मजबूर करना गलत है।
उसने साफ किया कि वह भारत की जय कहने को तैयार है, लेकिन 'माता' शब्द का प्रयोग करना उनकी व्यक्तिगत मान्यताओं का हिस्सा नहीं है। युवक ने मजबूती से कहा कि हम इसी देश के नागरिक हैं और किसी को भी हमारी देशभक्ति पर सवाल उठाने का हक नहीं है।
स्थानीय बुजुर्गों ने संभाली स्थिति
घटनास्थल पर काफी देर तक हंगामा होता रहा और भारी भीड़ जमा हो गई। मामला बिगड़ता देख गांव के कुछ जिम्मेदार और बुजुर्गों ने बीच-बचाव किया। उन्होंने उत्तेजित युवकों को शांत कराया और कश्मीरी व्यापारियों को वहां से सुरक्षित रवाना किया। इसके बाद दोनों कश्मीरी युवक दूसरे गांव की ओर चले गए।
सोशल मीडिया पर निंदा
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर साझा किए जाने के बाद लोगों ने इस व्यवहार की तीखी आलोचना की है। कई यूजर्स ने लिखा कि इस तरह की नफरत देश के सामाजिक ढांचे को नुकसान पहुंचा रही है।
इस पूरे प्रकरण पर स्थानीय पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में है। थाना छप्पर के प्रभारी वेदपाल ने बताया कि यह घटना सोमवार दोपहर की है, लेकिन अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई औपचारिक शिकायत या लिखित आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। पुलिस का कहना है कि बिना शिकायत के कानूनी कार्रवाई शुरू करना संभव नहीं है, हालांकि स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
25 दिनों के भीतर तीसरी ऐसी घटना
यमुनानगर की यह घटना पिछले 25 दिनों के भीतर हरियाणा में कश्मीरी व्यापारियों के साथ हुई तीसरी ऐसी घटना है। इससे पहले फतेहाबाद में एक विक्रेता का गला पकड़ने और कैथल में वेंडरों को अपशब्द कहकर भगाने के मामले भी सामने आ चुके हैं। बार-बार होती ये घटनाएं सवाल खड़ा करती हैं कि क्या रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों से आने वाले लोग यहाँ सुरक्षित महसूस कर पा रहे हैं या नहीं। फिलहाल, आपसी समझौते और स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप से मामला शांत हो गया है, लेकिन वीडियो के आधार पर सामाजिक मंचों पर यह बहस जारी है।
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