करनाल: विदेश जाने का सपना पड़ा महंगा, ऑस्ट्रेलिया की पीआर दिलाने के नाम पर 15 लाख रुपये की ठगी

एजेंट ने मेडिकल और पुलिस वेरिफिकेशन जैसी औपचारिकताएं भी पूरी करवाईं ताकि परिवार को शक न हो। हालांकि, साल 2024 से उसने संपर्क काटना शुरू कर दिया और दिसंबर 2025 में पीड़ितों के नंबर ब्लैकलिस्ट कर दिए।

Updated On 2026-01-14 13:50:00 IST

करनाल में विदेश भेजने के नाम पर ठगी। 

हरियाणा के करनाल में एक परिवार को ऑस्ट्रेलिया की स्थायी निवासी (PR) दिलाने का झांसा देकर 15 लाख रुपये हड़प लिए गए। सालों तक प्रक्रिया लटकाने और मेडिकल-वेरिफिकेशन के नाम पर गुमराह करने के बाद अब एजेंट ने पैसे लौटाने के बजाय पीड़ित परिवार को ही धमकी देनी शुरू कर दी है। पुलिस ने इस संबंध में पटियाला के इमिग्रेशन एजेंट के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

2017 में हुआ था 15 लाख का सौदा

गांव झंझाड़ी की निवासी सविता ने पुलिस को सौंपी शिकायत में बताया कि साल 2017 के जनवरी महीने में उनकी मुलाकात करनाल के सेक्टर-13 स्थित बीजी इमिग्रेशन के संचालक जतिन मलिक से हुई थी। ऑस्ट्रेलिया की फैमिली पीआर दिलाने के लिए दोनों पक्षों के बीच एक लिखित अनुबंध (Agreement) हुआ था। कुल 15 लाख की राशि तय की गई थी, जिसके तहत 10 लाख रुपये चेक के माध्यम से और 5 लाख रुपये नकद दिए गए थे। एजेंट ने वादा किया था कि वह 10 माह के भीतर पूरे परिवार को विदेश भेज देगा।

कोरोना काल में पैसे लौटाए, फिर दोबारा जाल में फंसाया

शिकायतकर्ता के अनुसार साल 2020 तक एजेंट केवल बहाने बनाता रहा और वीजा नहीं लगवाया। इसी दौरान वैश्विक महामारी कोरोना के कारण लॉकडाउन लग गया। साल 2020 में आरोपी ने ईमानदारी दिखाते हुए पूरे 15 लाख रुपये वापस कर दिए। हालांकि, यह महज एक चाल थी। जैसे ही लॉकडाउन खुला, साल 2022 में आरोपी ने दोबारा परिवार से संपर्क किया और दावा किया कि अब वीजा प्रक्रिया आसान हो गई है। उसने फिर से 5-5 लाख रुपये के तीन चेक लेकर कुल 15 लाख रुपये वापस ले लिए।

मेडिकल और पुलिस वेरिफिकेशन के नाम पर किया गुमराह

धोखाधड़ी को असली रूप देने के लिए आरोपी ने साल 2022 में परिवार का दोबारा पुलिस वेरिफिकेशन करवाया। इसके बाद साल 2023 में उसे मेडिकल रिपोर्ट सौंपने को कहा गया। पीड़ित परिवार ने सभी औपचारिकताएं पूरी कीं, लेकिन एजेंट हर बार नई कहानी सुनाकर समय टालता रहा। जब साल 2024 में आरोपी ने फोन उठाना बंद कर दिया, तो परिवार के सदस्य कुलदीप वर्मा खुद उसके पटियाला स्थित कार्यालय (एसएसटी नगर) पहुंचे। वहां भी उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

अदालत में झूठा केस दायर किया

आरोपी ने खुद को बचाने के लिए पटियाला की अदालत में सविता के खिलाफ एक केस दायर कर दिया, जिसमें उसने यह स्वीकार किया कि उसने विदेश भेजने के नाम पर 15 लाख रुपये लिए हैं। इसके बावजूद वह पैसे लौटाने का आश्वासन देता रहा। सविता का आरोप है कि जब उन्होंने सख्ती से अपनी रकम वापस मांगी तो जतिन मलिक ने अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक पहुंच का हवाला देते हुए उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी।

दिसंबर 2025 में नंबर किया ब्लॉक

मामला तब और बिगड़ गया जब दिसंबर 2025 में आरोपी ने पीड़ित परिवार के सभी नंबर ब्लैकलिस्ट कर दिए। संपर्क के सारे रास्ते बंद होने के बाद परिवार ने बैंक स्टेटमेंट और व्हाट्सएप चैट के सबूतों के साथ पुलिस अधीक्षक करनाल को गुहार लगाई। यह शिकायत करनाल के सिविल लाइन थाना पहुंची, जहां 12 जनवरी को आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई।

सभी दस्तावेजों और बैंक लेनदेन की हो रही जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए उप निरीक्षक राजेश कुमार को जांच सौंपी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इमिग्रेशन से जुड़े सभी दस्तावेजों और बैंक लेनदेन की जांच की जा रही है। पीड़ित परिवार ने मांग की है कि आरोपी के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए और उनकी मेहनत की गाढ़ी कमाई वापस दिलवाई जाए। पुलिस का दावा है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर जल्द ही आरोपी की गिरफ्तारी की जाएगी।

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