अल-फलाह यूनिवर्सिटी: फरीदाबाद में चेयरमैन पर दिल्ली पुलिस का शिकंजा, फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार

गिरफ्तारी के बाद चार दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा। जांच में सामने आया है कि यूनिवर्सिटी ने NAAC मान्यता होने का झूठा दावा कर छात्रों और अभिभावकों को गुमराह किया और अवैध रूप से करीब 415.10 करोड़ रुपये की आय अर्जित की।

Updated On 2026-02-05 11:36:00 IST

अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन को गिरफ्तार किया। 

हरियाणा के फरीदाबाद स्थित चर्चित अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया है, जिसके बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता और पूछताछ की आवश्यकता को देखते हुए सिद्दीकी को चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। यह पूरी कानूनी कार्रवाई यूजीसी की ओर से दर्ज कराई गई दो अलग-अलग प्राथमिकियों (FIR) के आधार पर अमल में लाई गई है।

दिल्ली ब्लास्ट से शुरू हुई थी जांच

इस मामले की शुरुआत दिल्ली में हुए एक विस्फोट के बाद हुई जांच से हुई थी। जांच के दौरान अल-फलाह यूनिवर्सिटी और इसके चैरिटेबल ट्रस्ट की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं, जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस मामले में अपनी जांच शुरू कर दी। दिल्ली की साकेत कोर्ट में हाल ही में इस मामले को लेकर सुनवाई हुई, जिसमें ईडी द्वारा पेश की गई मनी लॉन्ड्रिंग की चार्जशीट पर अदालत ने कड़ा संज्ञान लिया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस संस्थान के तार कई वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े हुए हैं।

करोड़ों की संपत्ति पर प्रवर्तन निदेशालय का कब्जा

प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई कर अल-फलाह यूनिवर्सिटी की लगभग 140 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क कर लिया है। जप्त की गई इन संपत्तियों में फरीदाबाद के धौज इलाके में मौजूद 54 एकड़ की विशाल जमीन, विश्वविद्यालय का मुख्य प्रशासनिक भवन, विभिन्न विभागों की इमारतें और छात्रों के हॉस्टल शामिल हैं। जांच एजेंसी ने इन संपत्तियों को धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत 'अपराध की आय' की श्रेणी में रखा है, जिसका अर्थ है कि इन्हें अवैध तरीके से कमाए गए धन से बनाया गया है।

फर्जी मान्यता के जरिए छात्रों के साथ बड़ा धोखा

जांच के दौरान यह बेहद गंभीर तथ्य सामने आया है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (NAAC) से मान्यता प्राप्त होने का झूठा दावा किया था। आरोप है कि यूनिवर्सिटी की नैक मान्यता काफी समय पहले ही समाप्त हो चुकी थी, लेकिन चेयरमैन और प्रशासन ने इस सच्चाई को छिपाकर छात्रों और उनके अभिभावकों को अंधेरे में रखा। इसी फर्जी दावे के बल पर विश्वविद्यालय में दाखिले लिए गए और करोड़ों रुपये की फीस वसूली गई। ईडी की रिपोर्ट के अनुसार इस धोखेबाजी के माध्यम से संस्थान ने कुल 415.10 करोड़ रुपये की अवैध आय अर्जित की है।

वित्तीय हेराफेरी और मनी ट्रेल का पर्दाफाश

सिद्दीकी के ठिकानों पर हुई छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नकदी, डिजिटल उपकरण और महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज बरामद किए गए हैं। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि विश्वविद्यालय के फंड को ठिकाने लगाने के लिए कई ठेके आरोपी के परिवार से जुड़ी निजी संस्थाओं को सौंप दिए गए थे। फंड की लेयरिंग के माध्यम से पैसों के असली स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई थी ताकि कानून की नजरों से बचा जा सके। फिलहाल पुलिस रिमांड के दौरान जवाद अहमद सिद्दीकी से इन तमाम वित्तीय लेनदेन और फर्जीवाड़े के पीछे शामिल अन्य चेहरों के बारे में पूछताछ की जाएगी। 

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