फरीदाबाद: दूसरी कक्षा की छात्रा से दरिंदगी करने वाले को 20 साल की सजा, कोर्ट ने लगाया भारी जुर्माना
यह घिनौनी वारदात अक्टूबर 2020 को सामने आई। बच्ची के माता-पिता काम पर गए थे, तभी आरोपी ने उसे बहला-फुल्काकर अपने कमरे में बुलाया और वारदात को अंजाम दिया।
कक्षा 2 की बच्ची से दुष्कर्म करने के दोषी को सजा सुनाई।
हरियाणा के फरीदाबाद जिले की एक अदालत ने मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले अपराधी को कड़ी सजा सुनाकर समाज में कड़ा संदेश दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हेमराज मित्तल की अदालत ने आरोपी रवि पांडेय (30 वर्ष) को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 55 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है।
पड़ोसी ने ही तार-तार किया भरोसा
यह घटना अक्टूबर 2020 की है। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले का रहने वाला रवि पांडेय फरीदाबाद के डबुआ थाना क्षेत्र की एक कॉलोनी में किराए पर रहता था। पीड़ित बच्ची, जो उस समय केवल दूसरी कक्षा में पढ़ती थी, आरोपी के पड़ोस में ही अपने परिवार के साथ रहती थी। 26 अक्टूबर 2020 को जब बच्ची के माता-पिता अपने काम पर गए हुए थे और वह घर में अकेली थी, तब रवि ने मासूमियत का फायदा उठाया।
काम का बहाना बनाकर कमरे में ले गया
पुलिस जांच के अनुसार आरोपी ने बच्ची को किसी जरूरी काम में मदद करने का झांसा दिया और उसे बहला-फुल्काकर अपने कमरे में ले गया। वहां उसने मासूम के साथ हैवानियत की। घटना के बाद जब माता-पिता काम से लौटे, तो उन्होंने बच्ची के व्यवहार में असामान्य बदलाव देखा। जब मां ने प्यार से पूछताछ की, तो बच्ची ने आपबीती सुनाई, जिसे सुनकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों ने दिलाई सजा
परिजनों की शिकायत पर फरीदाबाद के डबुआ थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर आरोपी को गिरफ्तार किया। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता के बयान, फॉरेंसिक मेडिकल रिपोर्ट और अन्य तकनीकी साक्ष्य पेश किए। न्यायाधीश हेमराज मित्तल ने मामले की गंभीरता और पीड़िता की उम्र को ध्यान में रखते हुए आरोपी को सख्त सजा सुनाई।
न्यायालय की कड़ी टिप्पणी
फैसला सुनाते समय अदालत ने स्पष्ट किया कि नाबालिगों के विरुद्ध होने वाले ऐसे जघन्य अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती। समाज में सुरक्षा का वातावरण बनाए रखने के लिए अपराधियों को कठोर दंड देना अनिवार्य है ताकि पीड़ितों को उचित न्याय मिल सके।
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