फरीदाबाद: SBI लॉकर से करोड़ों के गहने गायब, बैंक ने बिना बताए तोड़ा ताला, CA की शिकायत पर पुलिस जांच शुरू
लॉकर में 1 किलो सोना और 3 किलो चांदी के आभूषण रखे थे। लॉकर की मूल चाबी आज भी पीड़ित के पास सुरक्षित है और उनके खाते से सालाना किराया भी नियमित रूप से कट रहा था।
फरीदाबाद में एसबीआई बैंक के लॉकर से चोरी।
दिल्ली से सटे फरीदाबाद में बैंकिंग सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़ा करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। सेक्टर-15ए निवासी और पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) डीसी गर्ग ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की स्थानीय शाखा पर उनके लॉकर से करोड़ों रुपये के सोने-चांदी के गहने गायब करने का संगीन आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि बैंक ने नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी पूर्व सूचना के उनका लॉकर तोड़ दिया और उसमें रखी संपत्ति खुर्द-बुर्द कर दी।
पत्नी के बैंक पहुंचने पर चौंकाने वाला खुलासा
डीसी गर्ग का एसबीआई की सेक्टर-15 शाखा में वर्ष 2014 से खाता और लॉकर है। शुक्रवार को जब उनकी पत्नी नीलम गर्ग बैंक में लॉकर ऑपरेट करने पहुंचीं, तो वहां के कर्मचारियों ने उन्हें यह कहकर हैरान कर दिया कि उनके नाम पर कोई लॉकर आवंटित ही नहीं है। जब उन्होंने अपना लॉकर नंबर बताया, तो बैंक रिकॉर्ड में वह किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज मिला।
पुरानी चाबी हुई बेकार, बैंक ने किसी और को सौंपा लॉकर
नीलम गर्ग ने जब अपनी मूल चाबी से लॉकर खोलने का प्रयास किया, तो वह नहीं खुला। इसके बाद मौके पर पहुंचे डीसी गर्ग ने शाखा प्रबंधक पवन रावत से जवाब मांगा। आरोप है कि बैंक प्रबंधन ने स्वीकार किया कि लॉकर को तोड़कर उस पर नया ताला लगाया गया है और उसे दूसरे ग्राहक को जारी कर दिया गया है।
करोड़ों की संपत्ति का अता-पता नहीं
चार्टर्ड अकाउंटेंट डीसी गर्ग ने बताया कि उन्होंने लगभग 8 महीने पहले आखिरी बार अपना लॉकर इस्तेमाल किया था। उनके अनुसार, लॉकर में लगभग 1 किलो सोना और 3 किलो चांदी के कीमती जेवरात रखे हुए थे। गर्ग का आरोप है कि बैंक ने लॉकर तोड़ते समय न तो वीडियोग्राफी कराई, न गवाहों को बुलाया और न ही सामान की कोई सूची (इन्वेंट्री) तैयार की। बैंक अब यह बताने की स्थिति में नहीं है कि उनके करोड़ों के जेवरात कहां हैं।
बैंक और पुलिस का विरोधाभासी पक्ष
• बैंक का पक्ष : एसबीआई के क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल दलाल ने इसे बैंक का आंतरिक मामला बताते हुए कहा कि फिलहाल इसकी उच्च स्तरीय जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
• पुलिस का पक्ष : सेक्टर-15 पुलिस चौकी प्रभारी ओमप्रकाश ने बताया कि बैंक प्रशासन का दावा है कि डीसी गर्ग ने खुद लॉकर सरेंडर (वापस) किया था। हालांकि, बैंक अब तक सरेंडर से संबंधित कोई भी दस्तावेज़ पेश नहीं कर पाया है।
पुलिस ने जारी किया नोटिस
पुलिस ने बैंक प्रबंधन को कड़ा नोटिस जारी कर लॉकर से जुड़े तमाम रिकॉर्ड और सरेंडर पेपर मांगे हैं। पुलिस का कहना है कि यदि बैंक कागजात दिखाने में विफल रहता है, तो बैंक अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और चोरी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना शहर के अन्य लॉकर धारकों के बीच भी चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि पीड़ित का दावा है कि उनके खाते से लॉकर का सालाना शुल्क (2300 रुपये) नियमित रूप से कट रहा था और मूल चाबी आज भी उनके पास सुरक्षित है।
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