JNU Latest News: जेएनयू में फेशियल रिक्गिशन टेक्नोलॉजी? JNUSU अध्यक्ष समेत पांच पदाधिकारियों पर गिरी गाज

पिछले साल नवंबर महीने में फेशियल रिक्गिशन टेक्नोलॉजी लगाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया था। अब जेएनयूएसयू अध्यक्ष समेत पांच पदाधिकारियों को दो समेस्टर के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है।

Updated On 2026-02-03 16:44:00 IST

जेएनयूएसयू अध्यक्ष समेत पांच पदाधिकारियों को दो समेस्टर के लिए निलंबित किया। 

दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से रोजाना बवाल की खबरें सामने आती रहती हैं। इसी कड़ी में आज एक और बड़ी खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ यानी जेएनयूएसयू अध्यक्ष की कैंपस में एंट्री को बैन कर दिया है। यही नहीं, छात्र संघ के सभी चार पदाधिकारियों और पूर्व यूनियन अध्यक्ष नीतिशी कुमार पर भी बड़ा एक्शन लिया गया है। इन्हें दो समेस्टर के लिए रेस्टिकेट किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल नवंबर महीने में फेशियल रिक्गिशन टेक्नोलॉजी लगाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया था। विरोध प्रदर्शन की आड़ में डॉ. बीआर अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी समेत जेएनयू के कई शिक्षण जगहों पर तोड़फोड़ की गई थी। जेएनयू प्रबंधन ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। जांच में जेएनयूएसयू अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष गोपिका के बाबू, महासचिव सुनील यादव, संयुक्त सचिव दानिश अली और पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार को भी इन घटनाओं के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार पाया गया। इन सभी को आउट ऑफ बाउंड्स भी घोषित कर दिया गया था।

चीफ प्रॉक्टर ने 2 फरवरी को ऑफिस ऑर्डर जारी किया है, जिसके अनुसार सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज के पीएचडी स्कॉलर नीतीश कुमार को जेएनयू की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में दो समेस्टर के लिए निलंबित कर दिया गया है। यही नहीं, 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

जेएनयूएसयू ने किया पलटवार

जेएनयूएसयू ने इस फैसले को छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास बताया है। जेएनयूएसयू पर एडमिन एक्शन नाम के एक बयान में आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन और वाइस चांसलर सरकार के दबाव में काम कर रही है। जेएनयूएसयू ने आरोप लगाया कि यह एक्शन लिया गया क्योंकि हम यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेगुलेशंस 2026 पर रोक लगाने के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कहा कि यह कार्रवाई छात्र आंदोलन को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई है।

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