Republic Day 2026: गणतंत्र दिवस परेड की शान बढ़ाएगी ये धांसू हाइपरसोनिक मिसाइल, जानिये इसकी खासियत
Hypersonic Missile: ASL के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ए. प्रसाद गौड ने मीडिया से बात करते हुए हाइपरसोनिक मिसाइल के बारे में जानकारी साझा की है।
हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल को गणतंत्र दिवस परेड में प्रदर्शित किया जाएगा।
Republic Day 2026: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) भारतीय नौसेना की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक उन्नत हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित कर रहा है। इसे 77वें गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार प्रदर्शित किया जाएगा। एडवांस्ड सिस्टम्स लेबोरेटरी (ASL) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ए. प्रसाद गौड़ ने इस मिसाइल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने कहा कि यह मिसाइल मुख्य रूप से भारतीय नौसेना के लिए बनाई जा रही है, जो समुद्री क्षेत्र में भारत की रक्षा क्षमता को काफी मजबूत करेगी।
एडवांस्ड सिस्टम्स लेबोरेटरी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ए.प्रसाद गौड़ ने कहा कि यह मिसाइल भारतीय नौसेना की ज़रूरत के लिए DRDO द्वारा विकसित की जा रही है। इसका मुख्य फायदा यह है कि यह हाइपरसोनिक है, इसलिए दुश्मन के रडार इसे पकड़ नहीं पाएंगे। इसकी रेंज लगभग 1500 किलोमीटर है और यह अलग-अलग पेलोड ले जा सकती है। फिर समुद्र में तैनात जहाजों पर लगे वॉरहेड को नष्ट कर सकती है। यह हाइपरसोनिक गति और उच्च एयरोडायनामिक दक्षता के साथ यात्रा करती है। इससे समुद्री जल में भारत की क्षमता बढ़ेगी। DRDO हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल टेक्नोलॉजी और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है।
दुश्मन की दे सकेगी चकमा
उन्होंने आगे कहा कि इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत यह कि हाइपरसोनिक स्पीड से यात्रा कर सकेगी। हाइपरसोनिक स्पीड के कारण दुश्मन के रडार सिस्टम इसे आसानी से डिटेक्ट नहीं कर पाते। इससे मिसाइल को रोकना बहुत मुश्किल हो जाता है। ए. प्रसाद गौड़ ने बताया कि यह हाई एयरोडायनामिक एफिशिएंसी के साथ चलती है, जिससे यह तेज और प्रभावी तरीके से लक्ष्य तक पहुंचती है।
1500 किलोमीटर की रेंज
मिसाइल की रेंज लगभग 1500 किलोमीटर है। यह अलग-अलग प्रकार के पेलोड ले जाने में सक्षम है। मुख्य रूप से यह समुद्र में तैनात दुश्मन के जहाजों पर लगे वॉरहेड को नष्ट कर सकती है। यानी यह एंटी-शिप मिसाइल के रूप में काम करती है, जो एयरक्राफ्ट कैरियर या अन्य बड़े जहाजों को टारगेट कर सकती है। इससे भारतीय नौसेना को समुद्री इलाकों में मजबूत स्थिति मिलेगी।