ऑपरेशन मेरी सहेली  : एक साल में ट्रेनों में अकेले यात्रा करने वाली डेढ़ लाख महिलाओं की रेलवे ने की मदद

वर्तमान में महिला आरपीएफ कर्मियों से युक्त 230 से अधिक समर्पित मेरी सहेली टीमों को देशभर के विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर तैनात किया गया है। 

Updated On 2024-04-30 13:17:00 IST
Operation Meri Saheli

रायपुर। ट्रेन में अकेले यात्रा करने वाली महिलाओं की मदद करने के लिए रेलवे द्वारा विशेष अभियान मेरी सहेली चलाया जा रहा है। इसके तहत अप्रैल 2023 से लेकर मार्च 2024 तक अकेले रायपुर मंडल में ही 7945 ट्रेनों में 70790 महिलाओं की मदद की गई। सफर के दौरान इन्हें पानी से लेकर मेडिकल सहायता तक पहुंचाई गई। जोन के तीनों मंडलों में से रायपुर में सबसे ज्यादा महिलाओं तक टीम पहुंची है।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में मेरी सहेली की 13 टीम कार्यरत है, जो 13 अलग-अलग ट्रेनों को कवर करती है। रेलवे सुरक्षा बल की मेरी सहेली टीम में महिला कांस्टेबल से लेकर महिला सब इंस्पेक्टर, इंस्पेक्टर शामिल हैं। ये टीमें यात्रियों को उनकी यात्रा के दौरान सुरक्षा उपायों के बारे में शिक्षित करने और संकट की स्थिति में सहायता प्राप्त करने के लिए उपलब्ध चैनलों के बारे में जानकारी प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

मदद करने दूसरे जोन से दपूमरे आगे

भारतीय रेलवे में आरपीएफ ने वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान अब तक ट्रेनों या रेलवे परिसरों में प्रसव के 130 ऐसे मामलों में सहायता प्रदान की है। इस वर्ष दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में 19794 ट्रेनों में लगभग 1 लाख 51 हजार अकेले यात्रा कर रही महिला यात्रियों को "मेरी सहेली" की टीम ने सहायता पहुंचाई। इसमें बिलासपुर रेल मंडल में 7040 ट्रेनों में 67911 महिला यात्री, रायपुर रेल मंडल में 7945 ट्रेनों में 70790 महिला यात्री तथा नागपुर रेल मंडल 4809 ट्रेनों में 13278 महिला यात्री शामिल हैं।

हर दिन 14 हजार महिलाओं तक पहुंच रही मदद

मेरी सहेली' टीमें लंबी दूरी की ट्रेनों में अकेले यात्रा करने वाली महिला यात्रियों की ट्रेन यात्रा के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति पर त्वरित्त प्रतिक्रिया देकर प्रारंभिक बिंदु से उनके अंतिम गंतव्य तक सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं। वर्तमान में, महिला आरपीएफ कर्मियों से युक्त 230 से अधिक समर्पित मेरी सहेली टीमों को देशभर के विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर तैनात किया गया है, जो 400 से अधिक ट्रेनों को कवर करती हैं और हर दिन औसतन चौदह हजार से अधिक महिला यात्रियों को सहायता प्रदान करती हैं।

 

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