पटेल- पुजारी चर्चा परिचर्चा सम्मेलन संपन्न: दोरला समाज ने 16 बिंदुओं पर सामाजिक प्रतिबंध लगाकर लिया संकल्प

सुकमा जिले के अंतिम छोर पर स्थित कोंटा विकासखंड अंतर्गत जोन गोलापल्ली में दोरला समाज का पटेल- पुजारी चर्चा परिचर्चा सम्मेलन भव्य रूप से आयोजित किया गया।

Updated On 2026-01-18 14:55:00 IST

पटेल- पुजारी चर्चा परिचर्चा सम्मेलन संपन्न 

लीलाधर राठी- सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के अंतिम छोर पर स्थित कोंटा विकासखंड अंतर्गत जोन गोलापल्ली में दोरला समाज का पटेल- पुजारी चर्चा परिचर्चा सम्मेलन भव्य रूप से आयोजित किया गया। सम्मेलन में 9 पंचायतों के 40 गांवों से लगभग 3000 परिवारों ने भाग लेकर सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का परिचय दिया।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए समाज के प्रवक्ताओं और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने चिंता व्यक्त की कि दोरला समाज धीरे-धीरे अन्य समाजों की संस्कृति पर निर्भर होता जा रहा है, जिससे समाज की मूल परंपराएं, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक पहचान विलुप्त होने के कगार पर पहुंच रही हैं। वक्ताओं ने कहा कि जब समाज की अपनी समृद्ध संस्कृति, रहन-सहन और सामाजिक व्यवस्था सशक्त है, तो फिर अन्य धर्मों और संस्कृतियों की ओर आकर्षण क्यों बढ़ रहा है। इस पर आत्ममंथन की आवश्यकता है।

मतांतरित परिवारों की घर वापसी
सम्मेलन के दौरान समाज से अलग होकर ईसाई धर्म अपनाने वाले 47 परिवारों की समाज में पुनः वापसी कराई गई। इन परिवारों को मंच पर सम्मानित कर समाज की मुख्यधारा में शामिल किया गया। समाज के पदाधिकारी ने इसे सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। 


दोरला समाज द्वारा तय किए गए प्रमुख 16 सामाजिक नियम
दोरला समाज द्वारा सामाजिक मर्यादा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 16 प्रमुख सामाजिक नियमों पर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। निर्णय के अनुसार भागकर विवाह की स्थिति में 15 दिनों के भीतर लड़की के माता-पिता को सूचना देना अनिवार्य होगा, विलंब होने पर अर्थदंड लगाया जाएगा। साथ ही एक माह के भीतर समाज को सूचना देकर गांव में सामाजिक बैठक आयोजित करना तथा छह माह से एक वर्ष के भीतर सामाजिक विवाह संपन्न करना आवश्यक होगा। समाज ने विवाह समारोहों में डीजे और अंग्रेजी शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है, जिनके उल्लंघन पर कड़ा आर्थिक दंड निर्धारित किया गया है।

समाज में सुधार को लेकर लिया गया निर्णय
नियमों के तहत गैर-आदिवासी से विवाह, विवाहित महिला को बहला-फुसलाकर विवाह, मंदिर में विवाह तथा पत्नी के जीवित रहते दूसरी महिला अपनाने जैसे मामलों में भारी सामाजिक अर्थदंड और आवश्यकतानुसार सामाजिक बैठक के माध्यम से निर्णय लेने का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए समाज स्तर पर चर्चा कर विवाह तय करने, मृत्यु संस्कार में सीमित दान व्यवस्था तथा सामाजिक सहयोग की व्यवस्था को भी नियमों में शामिल किया गया है।

कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि
दोरला समाज के संभागीय अध्यक्ष अनिल बुर्का, विशेष अतिथि अर्जुन कारम, प्रवक्ता वीरैया ध्रुवा, संभागीय सचिव सोढ़ी भीमा, संभागीय संरक्षक तेल्लम बोरैक्षय्या, नरेंद्र बुर्का, सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष वेको हुंगा, उइका रवि, तुर्रम वीरभद्रा, सोढ़ी मुरली, उड़ीसा आदिवासी समाज के युवा दोरला समाज अध्यक्ष उइका भीमा, दोरला समाज संभागीय उपाध्यक्ष सुन्नम नागेश, ब्लॉक अध्यक्ष कोंटा आस मुकेश, ब्लॉक उपाध्यक्ष मड़कम मुदराज, मीडियम कामा, कुंजाम हुर्रा, मुर्रम गोपाल, सुन्नम धर्मा, मीडियम भाई, कोरसा सपना जोन के पदाधिकारी सहित ग्रामीण उपस्थित रहे।

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