सौर ऊर्जा ने छत्तीसगढ़ को दिया नया भरोसा: डबल सब्सिडी देकर हर घर को बिजली बिल मुक्त करना है सरकार की कोशिश

साय सरकार की सौर ऊर्जा नीति छत्तीसगढ़ को सस्ती, स्वच्छ और स्थायी ऊर्जा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रही है, अब हर घर पर सोलर पैनल लगाने से बिजली का बिल भरने से निजात मिलेगी।

Updated On 2026-01-20 16:05:00 IST

पीएम सूर्यघर योजना से साय सरकार ने सोलर प्लांट पर सब्सिडी और बिजली बिल शून्य हुए 

रायपुर। सौर ऊर्जा आज भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण स्वच्छ ऊर्जा मानी जा रही है, और छत्तीसगढ़ ने इस दिशा में देशभर में एक नई मिसाल पेश की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने दिसंबर 2023 से सत्ता संभालते ही ऊर्जा क्षेत्र में बड़े सुधार शुरू किए और सौर ऊर्जा को राज्य की विकास नीति का मुख्य स्तंभ बनाया।

केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के साथ तालमेल बैठाते हुए, राज्य सरकार ने सौर ऊर्जा को ग्राम पंचायत से लेकर शहरों तक तेज रफ्तार से पहुंचाया है। यह सिर्फ बिजली परियोजना नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय परिवर्तन का व्यापक अभियान बन चुका है।


सौर ऊर्जा को लेकर छत्तीसगढ़ का नया दृष्टिकोण
साय सरकार ने छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा को केवल एक तकनीकी परियोजना के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे राज्य के समग्र विकास का आधार बनाया है। सरकार का उद्देश्य है कि हर घर, हर गाँव और हर परिवार को स्थायी, स्वच्छ और किफायती ऊर्जा मिले। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में जहाँ साल के अधिकांश दिन धूप रहती है, वहां सौर ऊर्जा सबसे व्यवहारिक और भविष्य-दर्शी समाधान बनती है।

सरकार ने सोलर प्लांट, माइक्रो-ग्रिड और रूफटॉप सोलर सिस्टम जैसे कई स्तरीय मॉडल तैयार किए हैं, ताकि शहरों के साथ-साथ दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में भी ऊर्जा उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। यह रणनीति छत्तीसगढ़ को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने और पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भरता कम करने की दिशा में मजबूत कदम साबित हो रही है।


सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से तेजी पकड़ा अभियान
प्रधामंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना ने छत्तीसगढ़ में ऊर्जा परिवर्तन को नई गति दी है। इस योजना का उद्देश्य है कि हर घर अपनी छत पर सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित कर सके और अपने बिजली बिलों को लगभग शून्य तक ला सके। विष्णु देव साय सरकार ने इस योजना को राज्य में सबसे तेज़ी से लागू करने की दिशा में काम करते हुए सब्सिडी प्रक्रिया को सरल बनाया, आवेदन प्रणाली को डिजिटल किया और हर जिला मुख्यालय में सहायता केंद्र स्थापित किए।

इस पहल का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि अब आम परिवारों को भारी भरकम बिजली बिलों से राहत मिल रही है, साथ ही वे अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर आय भी प्राप्त कर सकते हैं। यह योजना छत्तीसगढ़ में ऊर्जा और आर्थिक दोनों रूपों में आत्मनिर्भरता की नींव रख रही है।


मुख्यमंत्री ने पीएम सूर्यघर योजना का निरीक्षण किया
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सूरजपुर के सरना पारा में श्रीमती राजकुमारी द्विवेदी के घर जाकर पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत स्थापित सोलर सिस्टम का निरीक्षण किया। उन्होंने सौर पैनल और तकनीकी व्यवस्थाओं की जानकारी ली और परिवार से योजना से मिलने वाले लाभों के बारे में चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना नागरिकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने अधिकारियों को गुणवत्ता और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

डबल सब्सिडी का लाभ
पूर्व में केंद्र सरकार इस योजना के अंतर्गत घरेलू उपभोक्ताओं को सोलर पैनल लगाने पर 60% तक की सब्सिडी देती थी। छत्तीसगढ़ सरकार अब इस सब्सिडी में अपनी भागीदारी जोड़कर उपभोक्ताओं को सब्सिडी प्रदान कर रही है। यानी, एक सामान्य 3 किलोवाट क्षमता वाले सोलर सिस्टम की लागत लगभग 1.5 लाख होती है, जिसमें अब उपभोक्ता को केवल 30 से 40 हजार ही वहन करना होगा।


आसान ऋण और सस्ती ईएमआई
छत्तीसगढ़ सरकार और बैंकिंग संस्थाओं के बीच हुए करार के तहत अब उपभोक्ताओं को 6.5% की रियायती ब्याज दर पर 10 वर्षों के लिए ऋण सुविधा उपलब्ध होगी। इससे मासिक ईएमआई बेहद कम हो जाएगी। इतना कम कि यह आपके मौजूदा मासिक बिजली बिल से भी कम हो सकता है।इसका अर्थ है कि उपभोक्ता हर माह बिजली का बिल देने के बजाय अब सोलर सिस्टम का ईएमआई देगा और कुछ वर्षों बाद जीवनभर मुफ्त बिजली का आनंद लेगा।


वर्चुअल नेट मीटरिंग का देश में पहला शहर बना रायपुर
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर ने प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत वर्चुअल नेट मीटरिंग (VNM) लागू कर देश में पहला शहर बनने की मिसाल बनाई। पार्थिवी पैसिफिक सोसायटी में 20 परिवारों ने साझा सोलर प्लांट लगाया, जिससे हर परिवार के बिजली बिल में सालाना लगभग 31,500 रुपये की बचत हुई। इस मॉडल से अपार्टमेंट या बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले लोग भी सौर ऊर्जा का लाभ उठा सकते हैं। परियोजना में केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी मिली, और इसे राज्य के अन्य शहरों में भी विस्तार देने की योजना है।

हर घर तक सौर ऊर्जा पहुँचाने की स्पष्ट रणनीति
विष्णु देव साय सरकार ने केवल शहरों या मुख्य बाज़ारों पर ध्यान केंद्रित नहीं किया, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए एक 'डोर-टू-डोर एनर्जी पहुंच योजना' तैयार की है। राज्य के कई दूरस्थ क्षेत्रों में बिजली की समस्या वर्षों से बनी हुई थी, लेकिन सौर ऊर्जा के माध्यम से अब वहाँ निरंतर बिजली उपलब्ध हो रही है।


सरकार ने विशेष रूप से उन गाँवों में सौर माइक्रो-ग्रिड स्थापित किए हैं, जहाँ परंपरागत बिजली लाइनें पहुँचाना कठिन था। इससे वहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और छोटे व्यवसायों में नया विकास दृष्टिकोण उत्पन्न हुआ है। यह कदम न केवल ऊर्जा उपलब्धता का समाधान दे रहा है बल्कि ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता को भी उन्नत बना रहा है।

आर्थिक राहत-बिजली बिल अब बोझ नहीं
सौर ऊर्जा योजना का सबसे बड़ा फायदा सीधा लोगों की जेब पर दिख रहा है। जिन परिवारों ने अपने घरों पर सोलर पैनल लगवाए हैं, उनमें से कई का बिजली बिल लगभग समाप्त हो चुका है। इससे उनकी मासिक आय में बचत बढ़ी है, जिसका उपयोग वे बच्चों की पढ़ाई, परिवार के स्वास्थ्य और अन्य जरूरी जरूरतों में कर पा रहे हैं।

राज्य सरकार ने साफ कहा है कि ऊर्जा नीति का उद्देश्य जनता की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना होना चाहिए, न कि सिर्फ उत्पादन क्षमता बढ़ाना। इसी सोच के तहत योजनाओं को आम परिवारों की सहूलियत के अनुसार डिज़ाइन किया गया है, जिनमें आसान आवेदन प्रणाली, तेज़ इंस्टॉलेशन और उच्च सब्सिडी शामिल हैं।


शिक्षक के घर सौर ऊर्जा से हुई बिजली की बचत
बलौदाबाजार भाटापारा के शिक्षक राजेश साहू ने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत अपने घर की छत पर 3 किलोवाट का सोलर पैनल सिस्टम लगवाया। योजना की सब्सिडी और आसान किस्तों की सुविधा से उन्होंने इसे स्थापित किया। अब उनका घर पूरी तरह सौर ऊर्जा से चलता है, जिससे बिजली बिल में भारी राहत मिली है। राजेश ने इस योजना को पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक बचत का उत्कृष्ट उदाहरण बताया और प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया।

पर्यावरण संरक्षण में बड़ा योगदान
विष्णु देव साय सरकार की सौर ऊर्जा नीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू पर्यावरण संरक्षण है। परंपरागत कोयला-आधारित बिजली घरों से काफी मात्रा में प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन होता था, लेकिन सौर ऊर्जा के विस्तार से इन उत्सर्जनों में उल्लेखनीय कमी आई है।

सोलर पैनलों का व्यापक उपयोग न केवल स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन करता है, बल्कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ के वायु गुणवत्ता मानकों को भी बेहतर बनाएगा। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित तभी होगा जब आज प्रकृति को सुरक्षित रखा जाए, और सौर ऊर्जा इस दिशा में सबसे प्रभावी समाधान है।


जशपुर का गांव बनेगा मॉडल सोलर विलेज
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत जशपुर जिले में एक ग्राम को मॉडल सोलर विलेज के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जिला स्तरीय समिति द्वारा 10 सबसे अधिक आबादी वाले ग्रामों को छह माह की प्रतिस्पर्धा में रखा गया है, जिसमें सर्वाधिक सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित करने वाले ग्राम को प्राथमिकता दी जाएगी। चयनित ग्राम के लिए 2 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डी.पी.आर.) 15 मार्च 2026 तक ऊर्जा विभाग को भेजा जाएगा।

छत्तीसगढ़ को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मजबूत कदम
सौर ऊर्जा विस्तार ने छत्तीसगढ़ को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का मजबूत आधार दिया है। राज्य न सिर्फ अपने ऊर्जा उपभोग को पूरा कर पाएगा बल्कि आने वाले वर्षों में अतिरिक्त बिजली उत्पादन करके राष्ट्रीय ग्रिड को भी ऊर्जा उपलब्ध करा सकेगा। राज्य के कई सरकारी भवन, स्कूल, अस्पताल और पंचायत भवन अब सौर ऊर्जा से चल रहे हैं, जिससे सरकारी व्यय में भी भारी बचत हो रही है। यह मॉडल भविष्य में पूरे देश के लिए एक प्रेरणास्रोत बन सकता है।

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