रायपुर एक्सप्रेस-वे बना धोबीघाट: रेलिंग उखाड़ ले गए चोर, प्रशासन ने कार्रवाई की बजाय उठा दी चार फिट ऊंची दीवार
राजधानी रायपुर के एक्सप्रेस-वे कपड़े सुखा रहे हैं। रेलिंग नहीं बची, सिर्फ कुछ लोहे ही बचे हैं। करोड़ों की रेलिंग कब चोरी हो गई, यह किसी को पता नहीं है।
एक्सप्रेस- वे से रेलिंग चोरी
मोनिका दुबे- रायपुर। यह किसी धोबी घाट की तस्वीर नहीं है, यह राजधानी रायपुर के एक्सप्रेस-वे का नजारा है। जहां कभी सुरक्षा के लिए लोहे की रेलिंग लगी थीं। अब वहां आम नागरिक कपड़े सुखा रहे हैं। रेलिंग नहीं बची, सिर्फ कुछ लोहे ही बचे हैं। लाखों लोग रोज़ इस रास्ते से गुजरते हैं, लेकिन करोड़ों की रेलिंग कब चोरी हो गई, यह किसी को पता नहीं है।
अब जब सब कुछ गायब हो गया, तो समाधान निकाला गया। रेलिंग नहीं, चार फीट ऊंची सीमेंट की दीवार उठा दी गई। क्योंकि, एक भरोसा तो है, सीमेंट चोरी नहीं होगा। दीवारें नहीं बोलतीं, इसलिए सवाल भी नहीं पूछेंगी। लेकिन जनाब, जो रेलिंग आधी सड़क पर झूले की तरह लटक रही हैं, वो क्या खुद चलकर गईं? या उन्हें भी कुछ ही दिनों में उखाड़ ले जाने की तैयारी है? अब ज़रा दूसरी तस्वीर देखिए अगर आप सुबह-सुबह या किसी इमरजेंसी में ट्रैफिक सिग्नल पार कर गए, तो ई-चालान झट से आपके मोबाइल में हाज़िर। ट्रैफिक पुलिस ऐसे लपकती है जैसे शिकार सामने हो चाबी निकाली जाती है। जेब ढीली कराई जाती है, तब जाकर मिलती है आज़ादी।
प्रशासनिक कार्यशैली में उठ रहे कई सवाल
सवाल यह है कि, जब करोड़ों की सार्वजनिक संपत्ति चोरी हो गई तो न चालान बना, न चाबी निकली, न जिम्मेदारी तय हुई। बस एक दीवार खड़ी कर दी गई ताकि चोरी दिखे नहीं, और सवाल उठे नहीं। यह एक्सप्रेस-वे नहीं है साहब... यह सिस्टम का आईना है। जहां आम आदमी की गलती पर तुरंत कार्रवाई और बड़े नुकसान पर चुप्पी की दीवार। क्योंकि यहां दीवारें खड़ी होती हैं जवाब नहीं है।