संदिग्ध कब्र से फैली दहशत: 15 दिनों तक दहशत में रहे ग्रामीण, खुदाई में निकला काला कुत्ते का शव

नारायणपुर जिले के मेरोली नदी के पास बनी एक संदिग्ध कब्र ने ग्रामीणों को लगभग 15 दिनों तक दहशत में रखा था। जब कब्र की खुदाई हुई तो वह काला कुत्ते का शव निकला।

Updated On 2026-01-08 14:15:00 IST

संदिग्ध कब्र

इमरान खान- नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब छह किमी दूर मेरोली नदी के पास बनी एक संदिग्ध कब्र ने ग्रामीणों को लगभग 15 दिनों तक दहशत में रखा। हत्या की आशंका और अफवाहों के बीच मामला उस समय शांत हुआ, जब पुलिस और प्रशासन की संयुक्त जांच में कब्र से किसी इंसान का नहीं, बल्कि एक काले कुत्ते का शव बरामद हुआ।

ग्रामीणों के अनुसार, मेरोली नदी किनारे जमीन में बनी कब्र के पास जलता हुआ दीपक, अगरबत्ती, फूल-माला, सिक्का और अन्य पूजा सामग्री मिली थी। इन परिस्थितियों ने हत्या या किसी गंभीर अपराध की आशंका को और गहरा कर दिया था। धीरे-धीरे यह चर्चा पूरे गांव और आसपास के इलाकों में फैल गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए बोरपाल गांव के सरपंच परमानंद नाग ने एड़का पुलिस थाना में शिकायत दर्ज कराई। सरपंच ने पुलिस को बताया कि गांव में हाल के दिनों में किसी की मृत्यु नहीं हुई है, इसके बावजूद अज्ञात शव के दफनाए जाने की आशंका है। 

टीआई ने शुरू की मामले की जांच
शिकायत के बाद एड़का थाना प्रभारी सुदर्शन घ्रुव के नेतृत्व में मामले की विवेचना शुरू की गई। थाना प्रभारी के निर्देश पर जिला अस्पताल, मिशन अस्पताल तथा आसपास के थानों में दर्ज गुम इंसान के मामलों की जांच कराई गई। मुसाफिर नाम सहित सभी संभावित रिकॉर्ड खंगाले गए, लेकिन कोई भी मामला संदिग्ध कब्र से मेल नहीं खा सका।

एफएसएल टीम मौके पर पहुंची
हत्या की आशंका को देखते हुए कांकेर जिले से एफएसएल की तीन सदस्यीय टीम को मौके पर बुलाया गया। एफएसएल टीम का नेतृत्व डॉ. कन्नौजे कर रहे थे। वहीं जिला अस्पताल से डॉ. प्रवीण चंद्र भंडारी और बेनूर स्वास्थ्य केंद्र से डॉ. दीप्ति भी मौके पर पहुंचे। पूरे घटनाक्रम के दौरान कार्यपालिक मजिस्ट्रेट वेद प्रकाश साहू की मौजूदगी रही। 

ग्रामीणों की मौजूदगी में हुई कब्र की खुदाई
प्रशासन और पुलिस की निगरानी में, करीब 150 से 200 ग्रामीणों की उपस्थिति में संदिग्ध कब्र की खुदाई कराई गई। जांच के दौरान कब्र से किसी मानव का शव नहीं, बल्कि एक काले कुत्ते का शव बरामद हुआ। इसके बाद पुलिस ने शव को पुनः दफना दिया। चार दिनों तक चली जांच और कार्रवाई के बाद मामला शांत हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस घटना के कारण गांव और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय तक भय और असमंजस का माहौल बना रहा।

पुलिस ने अफवाहों पर ध्यान ना देने की अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना सीधे प्रशासन को दें और अफवाहों पर ध्यान न दें। यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि बिना पुष्टि के फैली सूचनाएं किस तरह पूरे इलाके में दहशत का कारण बन सकती हैं।

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