रायपुर में सामाजिक सद्भाव बैठक: संघ प्रमुख भागवत बोले- लव जिहाद मतांतरण से सावधान रहने की जरूरत
रायपुर के श्री राम मंदिर में गुरुवार को सामाजिक सद्भाव बैठक में RSS डॉ. मोहन भागवत ने कहा, समाज में आपस में सहयोग बढ़े इसका सभी को प्रयास करना चाहिए।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत
रायपुर। राजधानी रायपुर के श्री राम मंदिर में गुरुवार को सामाजिक सद्भाव बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा, समाज में आपस में सहयोग बढ़े इसका सभी को प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा, लव जिहाद, मतांतरण से सावधान रहने की बड़ी जरूरत है। पंच परिवर्तन पर उन्होंने विस्तार से जानकारी दी। बैठक में विभिन्न जाति, समाज, पंथ के पांच सौ से अधिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
डॉ. भागवत ने कहा, भारत में सर्वत्र लोग अपनी-अपनी आस्था और आचरण के साथ सद्भाव के कारण एक साथ रहते हैं। घर का काम करने वाले नौकर को भी उस घर के बच्चे चाचा कहते हैं। उसे पूरा सम्मान देते हैं, यह सद्भाव कई वर्षों से चला आ रहा. है। अपनी-अपनी विशिष्टता के साथ आगे बढ़ने की अपने यहां पूर्ण स्वतंत्रता है, दूसरे का भी सम्मान करें। जहां सद्भावना पक्की है वहां बिगाड़ने वालों की नहीं चलेगी। तोड़ने वाली शक्तियां असफल हों इसके लिए हमें प्रयास करना है। हम सब एक दूसरे को पकड़कर चलें, जहां समाज में संगठन और सद्भावना है वहां वह असफल हो जाते हैं। यह जानकारी बताने से ही जाएगी। लव जिहाद, मतांतरण से सावधान रहने की जरूरत है। इसके लिए जन जागरण भी जरूरी है।
घर में कुटुंब प्रबोधन करें
दूसरा, घर में कुटुंब प्रबोधन करें। सप्ताह में एक दिन निश्चित करें और सब लोग एकत्र हों। भजन आदि करें और घर में बना भोजन मिलकर करना। उसके बाद चर्चा करना। हमारी कुल रीति क्या है, हमारे पूर्वज कौन थे, उनकी विशेषता क्या थी, हम उनके संस्कार को कितना मानते हैं। कुछ कमी है तो उसे दूर करना। परिवार के बीच देश की चर्चा करें। देश में क्या अच्छी चीजें हैं, क्या चुनौती हैं। ऐसे विषयों पर सहमति बनाएं तभी उन्हें लागू करें। ऐसा मंगल संवाद सप्ताह में एक दिन करना चाहिए। इसी तरह समाज के कार्य में मैं कितना समय दे सकता हूं, यह तय करें। समाज के लोगों को भी दिखाइए।
हर समाज में मित्र कुटुंब बनाएं
हमारे बीच के जो लोग दुर्बल या वंचित हैं उनके सशक्तिकरण के लिए कुछ कर सकते हैं क्या। हर बैठक में तय करके आगे बढ़ना, हम समर्थ हैं तो हमारा सामर्थ्य उनके उपयोग में आना चाहिए। हमारा पूरा समाज एक है, जाति पंथ उसके अंग है, जिस प्रकार पूरा शरीर एक है, इसी तरह हमारी पृथक आस्था व आचरण होने के बाद भी हमारी अस्मिता एक हैं। हम अपनी जाति बिरादरी की उन्नति के लिए क्या करते हैं, इसके बाद एक बड़ा समाज है उसकी उन्नति के लिए क्या कर सकते हैं। हम सभी जाति, पंथ बिरादरी मिलकर जिस क्षेत्र में निवास करते हैं उसकी उन्नति के लिए क्या कर सकते हैं, यह साझा विचार करना चाहिए। हर समाज में हमारे मित्र हों, मित्र कुटुंब बनाएं।
पानी बचाएं, प्लास्टिक का उपयोग कम करें
तीसरा, पर्यावरण संरक्षण का विषय है। पानी बचाइए, प्लास्टिक का उपयोग कम करें, पेड़ लगाइए। यह कार्य तो हम सब व्यक्तिगत स्तर पर कर सकते हैं। चौथा, घर में अपनी भाषा बोलेंगे, कोई एक भारतीय भाषा सीखेंगे। अपने घर में मातृभाषा में बातचीत करना तथा अपना वेश पहनना चाहिए। अपनी वेशभूषा पहनना ही भूल गया यह तो उचित नहीं है। अपने घर में अपने आदर्श, महापुरुष, संत की फोटो होनी चाहिए। देश दुनिया में भ्रमण करना चाहिए किन्तु अपने आसपास कि झुग्गी में भी कभी कभार जाना, वह भी अपना है। पांचवां, संविधान में प्रस्तावना, मौलिक अधिकार, नागरिक कर्तव्य, नीति निर्देशक तत्व बताए गए हैं। सबको इसकी जानकारी होनी चाहिए। देश के सभी नियम कानून का पालन करना चाहिए। कुछ बातें लिखित नहीं होती, लेकिन वह सामाजिक मूल्य हैं। बड़े बुजुर्गों का बच्चे सम्मान करें उससे विनम्रता आती है, यह सब करने से समाज में सद्भभावना बढ़ती है। समाज में आपस में सहयोग बढ़े इसका प्रयास प्रत्येक समाज को करना चाहिए। खंड स्तर पर यह प्रयास हो इस दिशा में सक्रिय हों।
सर्व समाज के साथ भोजन
इस अवसर पर विविध जाति, पंथ और समाजों के प्रतिनिधियों के साथ डॉ मोहन भागवत ने पंगत में भोजन किया। सामाजिक सद्भाव बैठक में विभिन्न समाज के लोगों ने अपने समाज में हो रहे सामाजिक कार्यों के प्रेरक उदाहरण साझा किए। सामाजिक सद्भाव बैठक की प्रस्तावना मध्य क्षेत्र के क्षेत्र संघचालक डॉ पूर्णेन्दु सक्सेना ने प्रस्तावना एवं प्रांत संघचालक टोपलाल वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।डॉ. मोहन भागवत गुरुवार को शाम को रायपुर के तीन दिनों के प्रवास के बाद वापस लौट गए।