आंबेडकर हॉस्पिटल में क्रिटिकल हार्ट सर्जरी: पंपिंग क्षमता बच गई थी केवल 20%, पैरों की नस के माध्यम से बचाई गई जान
आंबेडकर अस्पताल में हृदय की जटिल शल्यक्रिया की गई। रायपुर निवासी एक बुजुर्ग महिला लंबे समय से सांस फूलने एवं हार्ट फेलियर से पीड़ित थी।
डॉक्टर्स की टीम
रायपुर। आंबेडकर अस्पताल में हृदय की जटिल शल्यक्रिया की गई। रायपुर निवासी एक बुजुर्ग महिला लंबे समय से सांस फूलने एवं हार्ट फेलियर से पीड़ित थी। जांच में सामने आया कि उनका ऑर्टिक वाल्व पूरी तरह कैल्शियम से कठोर हो चुका था, जिसके कारण हृदय की पंपिंग क्षमता मात्र 20 प्रतिशत रह गई थी। कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव के अनुसार इस अवस्था में ओपन हार्ट सर्जरी अत्यंत जोखिमपूर्ण एवं लगभग असंभव थी। बिना चीर-फाड़ के पैर की नस के माध्यम से वाल्व प्रत्यारोपण का निर्णय लिया गया।
मरीज की पैर की नसें पतली एवं कैल्शियम युक्त थीं, जिससे वाल्व डिलीवरी सिस्टम को हृदय तक पहुंचाना अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। साथ ही, जन्मजात संरचनात्मक विसंगति के कारण हृदय की कोरोनरी धमनियां वाल्व के काफी समीप थीं, जिससे वाल्व प्रत्यारोपण के दौरान दोनों धमनियों के बंद होने का गंभीर खतरा था। इस जटिलता से निपटने के लिए विशेषज्ञों ने दोनों कोरोनरी धमनियों में स्टेंट डालकर उनके और वाल्व के बीच "चिमनी" संरचना तैयार की। प्रक्रिया के अंतिम चरण में वाल्व डिलीवरी के दौरान बाएं पैर की नस में ब्लॉकेज उत्पन्न हो गया, जिसे दाहिने पैर के रास्ते तत्काल बलून एंजियोप्लास्टी कर रक्त प्रवाह पुनः स्थापित किया गया।
स्टैंडबाई में रही ओपन हार्ट सर्जरी टीम
लगभग चार घंटे चली इस जटिल प्रक्रिया के पश्चात ऑपरेशन टेबल पर ही मरीज के ऑर्टिक वाल्व का प्रेशर 80 से घटकर शून्य हो गया और हृदय की पंपिंग क्षमता 20 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गई। दोनों कोरोनरी धमनियों में रक्त प्रवाह सामान्य रहा तथा हृदय की धड़कन पूरी तरह स्थिर रही। प्रक्रिया के दौरान अनहोनी की आशंका को देखते हुए सुरक्षा के दृष्टिकोण से ओपन हार्ट सर्जरी की टीम को स्टैंडबाई में रखा गया। इस दौरान हृदय की धड़कन अनियमित होने की आशंका को देखते हुए 24 घंटे के लिए टेम्पररी पेसमेकर का बैकअप सुनिश्चित किया गया। प्रक्रिया पश्चात जटिलताओं की आशंका के चलते मरीज को हार्ट कमांड सेंटर में अति गहन निगरानी में रखा गया, जहां रिमोट व्यूइंग टेक्नोलॉजी के माध्यम से टेली-मॉनिटरिंग की गई।
मरीज डिस्चार्ज
मरीज वर्तमान में स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर डिस्चार्ज लेकर अपने घर जा चुकी है। चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. विवेक चौधरी ने बताया कि वर्ष 2025 में कार्डियोलॉजी विभाग द्वारा 2600 से अधिक जटिल हृदय प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक की गई। अस्पताल अधीक्षक प्रो. डॉ. संतोष सोनकर ने इसके लिए कार्डियोलॉजी टीम को बधाई दी। कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष सहित कार्डियक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू, डॉ. शिवकुमार शर्मा, डॉ कुणाल ओस्तवाल, डॉ. प्रतीक गुप्ता, डॉ. सौम्या, डॉ. वैभव एवं डॉ. प्रिंस इस ऑपरेशन का हिस्सा रहे। टीम में कैथलैब टेक्नीशियन जितेंद्र, बद्री, प्रेमचंद तथा स्टाफ नर्स आनंद, डिगेन्द्र सहित अन्य का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्डियक एनेस्थेसियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. बालस्वरूप साहू एवं डॉ. संकल्प दीवान का भी विशेष सहयोग रहा।