पटवारी से आरआई पदोन्नति परीक्षा निरस्त: हाईकोर्ट ने कहा- परीक्षा में भाई-भतीजावाद और पक्षपात हुए, नए सिरे से लेने की छूट

पटवारी से राजस्व निरीक्षक पदोन्नति परीक्षा को लेकर चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं और जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रशिक्षण की मांग वाली याचिकाएं हाईकोर्ट ने खारिज कर दी।

Updated On 2026-01-03 12:27:00 IST

बिलासपुर हाईकोर्ट

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसलें में पटवारी से राजस्व निरीक्षक के पद पर आयोजित पदोन्नति परीक्षा हाईकोर्ट ने निष्पक्षता के अभाव में परीक्षा की प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने चयन प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद और पक्षपात के संकेत मिलने की बात कही है।

इस फैसले के बाद 216 पटवारियों को दी गई पदोन्नति स्वतः समाप्त हो जाएगी। जस्टिस एनके व्यास ने अपने फैसले में कहा है कि पदोन्नति परीक्षा प्रणाली दूषित थी और चयन प्रक्रिया पारदर्शी व निष्पक्ष नहीं थी। कोर्ट ने माना कि परीक्षा और चयन प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं, जिनसे परीक्षा की विश्वसनीयता और पवित्रता पर सवाल खड़े होते हैं।

प्रक्रिया ही दूषित, ट्रेनिंग पर नहीं भेजने के निर्देश
कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा है कि, जब पदोन्नति परीक्षा ही कदाचरण के घेरे में है और दूषित है तब पटवारी से पदोन्नति प्राप्त राजस्व निरीक्षकों को प्रशिक्षण पर भेजने का प्रश्न ही नहीं उठता। हाईकोर्ट ने राज्य शासन को छूट दी है कि, वह पटवारी से राजस्व निरीक्षक पद पर पदोन्नति के लिए नई परीक्षा आयोजित कर सकता है।

योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिले- हाईकोर्ट
कोर्ट ने साफ कहा कि, परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि, राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि, भविष्य में ऐसे किसी भी चयन प्रक्रिया में परीक्षा की पवित्रता और निष्पक्षता से कोई समझौता न हो। योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिले और किसी भी प्रकार का पक्षपात या अनुचित लाभ न दिया जाए।

कोर्ट ने कहा-चयन प्रक्रिया में भारी पक्षपात
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि, उपलब्ध रिकॉर्ड और याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत तथ्यों से यह स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि चयन प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद, कदाचरण और पक्षपात किया गया। कोर्ट ने माना कि परीक्षा न तो समान अवसर के सिद्धांत पर आधारित थी और न ही यह प्रशासनिक पदोन्नति के मानकों पर खरी उतरती है। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि, राजस्व निरीक्षक का पद एक प्रोफेशनल और जिम्मेदारीपूर्ण पद है। जहां पारदर्शिता और योग्यता सर्वोपरि होनी चाहिए। यदि पदोन्नति की प्रक्रिया ही संदेह के घेरे में हो, तो ऐसे चयन को वैध नहीं माना जा सकता।

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