गणतंत्र दिवस की खुशियां मातम में बदलीं: बिहार के नवादा में आग लगने से 5 बच्चे झुलसे, एक की हालत गंभीर
बिहार के नवादा जिले में गणतंत्र दिवस पर निकली स्कूल झांकी के दौरान आग लगने से पांच बच्चे झुलस गए। पेट्रोल के इस्तेमाल से हुआ हादसा, स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप।
बिहार के नवादा जिले में गणतंत्र दिवस पर निकली स्कूल झांकी के दौरान आग लगने से पांच बच्चे झुलस गए।
Republic Day Nawada Jhanki Accident: बिहार के नवादा जिले में गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित झांकी कार्यक्रम एक बड़े हादसे में तब्दील हो गया। वारिसलीगंज नगर परिषद क्षेत्र के सब्जी बाजार इलाके में स्कूल की झांकी के दौरान अचानक आग लग गई, जिसमें पांच बच्चे झुलस गए। इस घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया।
झांकी प्रदर्शन के दौरान भड़की आग
जानकारी के मुताबिक, एक निजी स्कूल द्वारा गणतंत्र दिवस पर झांकी निकाली जा रही थी। जब झांकी बाजार क्षेत्र से गुजर रही थी, उसी दौरान प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे ज्वलनशील पदार्थ में चूक हो गई, जिससे आग भड़क उठी। आग की चपेट में आकर झांकी में शामिल बच्चे झुलस गए।
एक बच्ची की हालत नाजुक
हादसे में झुलसी एक बच्ची की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसे बेहतर इलाज के लिए पावापुरी स्थित विम्स अस्पताल रेफर किया गया है। वहीं दो अन्य बच्चों का इलाज वारिसलीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है। बाकी बच्चों को भी प्राथमिक उपचार दिया गया।
स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप
घटना के बाद स्कूल प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि हादसे के तुरंत बाद बच्चों को अस्पताल पहुंचाने के लिए स्कूल की ओर से कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने ही मानवता दिखाते हुए बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया।
झांकी में पेट्रोल के इस्तेमाल से बढ़ा खतरा
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, झांकी के प्रदर्शन में पेट्रोल का उपयोग किया जा रहा था। सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण यह बड़ा हादसा हुआ। इस खुलासे के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
CCTV जांच और कार्रवाई की मांग तेज
घटना से आक्रोशित बच्चों के परिजनों ने इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने की मांग की है। साथ ही जिला प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की गई है।
प्रशासन से जांच की मांग
मामले को लेकर जिला पदाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी से निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार स्कूल प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग तेज हो गई है।