तेज प्रताप का पटना में दही-चूड़ा भोज: पिता लालू यादव समेत पहुंचे कई दलों के नेता, तेजस्वी-राबड़ी रहे गायब
पटना में तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा कार्यक्रम में लालू प्रसाद की मौजूदगी चर्चा में रही, जबकि तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी नजर नहीं आए। कार्यक्रम में कई बड़े नेता शामिल हुए।
तेज प्रताप यादव द्वारा आयोजित दही-चूड़ा भोज में उनके पिता लालू प्रसाद यादव समेत कई पार्टियों के नेता पहुंचे।
Tej Pratap Yadav News: तेजप्रताप यादव ने बुधवार, 14 जनवरी को पटना में अपने आवास पर चूड़ा-दही का कार्यक्रम रखा। इस कार्यक्रम में उनके पिता और आरजेडी पार्टी के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव समेत अन्य पार्टियों के कई नेता पहुंचे। हालांकि, तेज प्रताप के छोटे भाई तेजस्वी यादव और मां राबड़ी देवी इस खास मौके पर गैरहाजिर रहीं।
तेप्रताप के निमंत्रण पर पहुंचे लालू
तेज प्रताप यादव ने इस आयोजन के लिए लालू परिवार को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित किया था। कार्यक्रम स्थल पर लालू प्रसाद के पहुंचते ही तेज प्रताप यादव ने आगे बढ़कर उनका स्वागत किया। आसपास मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भी उनका अभिवादन किया।
परिवार के बाकी सदस्यों की गैरहाजिरी पर चर्चा
जहां लालू प्रसाद की मौजूदगी को खास माना जा रहा है, वहीं तेजस्वी यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का कार्यक्रम में न आना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। दोनों को न्योता दिया गया था, लेकिन वे आयोजन में शामिल नहीं हुए।
राज्यपाल के साथ मंच साझा करते दिखे लालू यादव
भोज के दौरान एक और दृश्य सुर्खियों में रहा। तस्वीरों में देखा गया कि बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान भी कार्यक्रम में मौजूद थे और मंच पर लालू प्रसाद उनके साथ बैठे नजर आए। वहीं, तेज प्रताप यादव अपने पिता के पास ही बैठे दिखाई दिए।
कई दलों के नेताओं की मौजूदगी
इस आयोजन में सिर्फ राजद के नेता ही नहीं, बल्कि अन्य राजनीतिक दलों से जुड़े चेहरे भी पहुंचे। पशुपति पारस, प्रभुनाथ यादव और तेज प्रताप के मामा साधु यादव की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और खास बना दिया। बताया जा रहा है कि तेज प्रताप ने सत्ता और विपक्ष—दोनों पक्षों के नेताओं को न्योता दिया था।
पहले ही दिखा दी थी पूरी तैयारी
कार्यक्रम से पहले तेज प्रताप यादव ने अपने सोशल प्लेटफॉर्म TY Vlog के जरिए तैयारियों की झलक दिखाई थी। वीडियो में दही-चूड़ा, तिल, तिलकुट से लेकर टेंट और बैठने की व्यवस्था तक सब कुछ नजर आया था। बुधवार को इन्हीं तैयारियों के बीच लगातार मेहमानों का आना-जाना लगा रहा।
सियासी संकेतों पर टिकी नजर
राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब इस बात पर है कि यह भोज सिर्फ पारंपरिक आयोजन था या इसके जरिए कोई राजनीतिक संदेश भी दिया गया। खासतौर पर परिवार के कुछ सदस्यों की अनुपस्थिति को लेकर अटकलें तेज हैं।