कैबिनेट विस्तार से पहले नीतीश सरकार का 'हंटर': बोर्ड-निगम और आयोगों में होगी बड़ी छंटनी! जानें वजह
नीतीश सरकार कैबिनेट विस्तार से पहले एक्शन मोड में है। बिहार में बोर्ड, निगम और आयोगों के पुनर्गठन की तैयारी, चुनावी प्रदर्शन के आधार पर होगी छंटनी।
नीतीश सरकार कैबिनेट विस्तार से पहले बिहार में बोर्ड, निगम और आयोगों के पुनर्गठन की तैयारी कर रही है। (फाइल फोटो)
Bihar News: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित कैबिनेट विस्तार से पहले बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार अब एक्शन मोड में नजर आ रही है और इसी कड़ी में बोर्ड, निगम और मनोनयन के जरिए गठित आयोगों के पुनर्गठन की तैयारी शुरू कर दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, जहां कुछ मौजूदा पदधारकों की छुट्टी हो सकती है, वहीं कुछ नए आयोगों के गठन की भी रूपरेखा बनाई जा रही है।
चुनावी भूमिका के आधार पर होगी समीक्षा
एनडीए के सभी घटक दल इस समय इस बात की समीक्षा में जुटे हैं कि पिछले वर्ष जिन नेताओं और कार्यकर्ताओं को बोर्ड-निगम व आयोगों में जगह दी गई थी, वे विधानसभा चुनाव में कितने उपयोगी साबित हुए। कई जगहों से यह फीडबैक सामने आया है कि अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। इसी आधार पर अब आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
दल विरोधी गतिविधियों की शिकायतें आईं सामने
खबरों के मुताबिक, कुछ पदधारकों के खिलाफ दल विरोधी आचरण की गंभीर शिकायतें भी मिली थीं। इन शिकायतों की अंदरूनी जांच लगभग पूरी हो चुकी है। पहले ही संगठन के निचले स्तर के कुछ पदाधिकारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है और अब मनोनयन के जरिए मंत्री स्तर की सुविधाएं पाने वाले नेताओं पर भी गाज गिर सकती है।
कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति और नागरिक परिषद पर खास नजर
सरकार की समीक्षा में सबसे ज्यादा ध्यान कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति और बिहार नागरिक परिषद पर है। चुनाव से ठीक पहले नागरिक परिषद का विस्तार जिलों तक किया गया था, वहीं प्रखंड स्तर पर कार्यक्रम कार्यान्वयन समितियों का गठन कर हजारों कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मकसद था कि ये पदधारी चुनाव में एनडीए उम्मीदवारों के लिए मजबूत नेटवर्क बनें।
चुनाव बाद सामने आईं गंभीर शिकायतें
हालांकि, चुनाव नतीजों के बाद कई उम्मीदवारों ने शिकायत की कि कुछ पदधारक जीत की बजाय हार का माहौल बनाने में लगे रहे। मधुबनी जिले के बाबूबरही से जदयू विधायक मीना कामत ने एक मंत्री-स्तरीय पदधारक के खिलाफ लिखित शिकायत भी दर्ज कराई है, जिस पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। ऐसे मामलों को भी नए सिरे से खंगाला जा रहा है।
विधायक बने पदधारकों की जगह नए चेहरों को मौका
बिहार नागरिक परिषद में मंत्री स्तर के कुछ पदधारी अब विधायक बन चुके हैं। इनमें जदयू के मंजीत कुमार सिंह और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के माधव आनंद शामिल हैं, जो परिषद के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। परिषद के प्रस्तावित पुनर्गठन में इनकी जगह नए चेहरों को अवसर दिए जाने की संभावना है।
फरवरी में हो सकता है युवा आयोग का गठन
विधानसभा चुनाव से पहले युवा आयोग के गठन की घोषणा जरूर हुई थी, लेकिन उस समय पदों पर मनोनयन नहीं हो सका। अब उम्मीद है कि फरवरी महीने में इस आयोग का औपचारिक गठन कर दिया जाएगा। आयोग में एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष और सात सदस्य होंगे। इसके लिए अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष तय की गई है और इस बार सक्रिय कार्यकर्ताओं के बजाय विषय विशेषज्ञों को प्राथमिकता देने की तैयारी है।