महाराष्ट्र में 'पवार' पॉलिटिक्स का नया अध्याय: सुनेत्रा पवार बन सकती हैं डिप्टी–CM; बारामती उपचुनाव और शरद गुट में विलय की अटकलें तेज
अजित गुट का शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी में विलय होने की अटकलें भी तेज हैं, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है।
अजित पवार की राजनीतिक विरासत को उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ही आगे बढ़ा सकती हैं।
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति के कद्दावर नेता अजित पवार के अचानक चले जाने से राज्य में एक बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। खबरों की माने तो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अब अपने अस्तित्व और नेतृत्व को बचाने के लिए नए विकल्पों पर विचार कर रही है।
इस समय सबसे बड़ी चर्चा अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को लेकर है, जिन्हें न केवल बारामती से चुनावी मैदान में उतारने बल्कि राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाने की तैयारी भी चल रही है। इसके साथ ही, पिछले काफी समय से अलग चल रहे 'पवार परिवार' के फिर से एक होने की खबरें भी गलियारों में तैर रही हैं।
सुनेत्रा पवार की उपमुख्यमंत्री पद पर दावेदारी और बारामती से उम्मीदवारी
अजित पवार के निधन के बाद बारामती विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना अनिवार्य है। पार्टी सूत्रों और समर्थकों का मानना है कि अजित पवार की राजनीतिक विरासत को उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ही आगे बढ़ा सकती हैं। चर्चा है कि महायुति सरकार (BJP-शिवसेना-NCP) में अजित पवार के रिक्त स्थान को भरने के लिए सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है।
वर्तमान में वे राज्यसभा सांसद हैं, लेकिन उपचुनाव जीतकर वे विधानसभा में अपनी जगह पक्की कर सकती हैं। कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग 'दादा' की जगह 'वहिनी' (भाभी) को नेतृत्व करते देखना चाहता है।
एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की बढ़ती संभावना
अजित पवार के बिना उनके गुट के विधायकों को एकजुट रखना एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि एनसीपी (अजित गुट) का विलय वापस शरद पवार के नेतृत्व वाली मुख्य पार्टी में हो सकता है। अजित पवार के अंतिम संस्कार के समय पूरे पवार परिवार की एकजुटता ने इन अटकलों को और हवा दे दी है।
यदि यह विलय होता है, तो महाराष्ट्र की राजनीति का पूरा समीकरण बदल जाएगा और शरद पवार एक बार फिर किंगमेकर की भूमिका में आ जाएंगे।
पार्थ और जय पवार के राजनीतिक भविष्य पर मंथन
अजित पवार के दोनों बेटों की भूमिका को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चाएं तेज हैं। बड़े बेटे पार्थ पवार, जो पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं, अब संगठन की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।
वहीं, छोटे बेटे जय पवार को लेकर भी समर्थकों में उत्साह है। हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि इस संक्रमण काल में सुनेत्रा पवार का अनुभव और उनकी स्वीकार्यता पार्टी को बिखरने से बचाने में सबसे ज्यादा मददगार साबित होगी।
महायुति सरकार के स्थिरता पर पड़ने वाला प्रभाव
अजित पवार के जाने से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के लिए भी मुश्किलें बढ़ी हैं। अजित पवार सरकार में वित्त विभाग संभाल रहे थे और उनके पास 41 विधायकों का समर्थन था।
अगर यह गुट शरद पवार की ओर वापस लौटता है, तो महायुति सरकार के पास बहुमत का आंकड़ा गड़बड़ा सकता है। बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व फिलहाल वेट-एंड-वॉच की स्थिति में है और कोशिश कर रहा है कि एनसीपी के विधायक उनके साथ बने रहें।