डिजिटल जनगणना 2027 नोटिफिकेशन जारी: आपके घर की सुविधाओं से लेकर मोबाइल-इंटरनेट तक, पूछे जाएंगे ये 33 सवाल!

केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के पहले चरण का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसकी शुरुआत मकानों के सर्वे से होगी, जिसमें नागरिकों से 33 सवाल पूछे जाएंगे।

Updated On 2026-01-23 08:34:00 IST

यह डेटा देश की सरकार के योजनाओं और बजट आवंटन के लिए एक विश्वसनीय दस्तावेज होगा।

नई दिल्ली : भारत सरकार ने देश की आगामी जनगणना (Census 2027) के लिए औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। केंद्र सरकार द्वारा जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, इस महाअभियान के पहले चरण में मकानों की सूची तैयार करने और उनके सूचीकरण का काम किया जाएगा।






यह स्वतंत्र भारत के इतिहास की पहली 'डिजिटल जनगणना' होगी, जिसमें नागरिकों के रहन-सहन, घर की स्थिति और उपभोग की वस्तुओं से जुड़े कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे। यह डेटा भविष्य में देश की आर्थिक और सामाजिक नीतियों का मुख्य आधार बनेगा।

​मकानों के सर्वे से पहले चरण का आगाज

​जनगणना के पहले चरण में मुख्य फोकस मकानों के प्रकार और परिवार की संरचना पर रहेगा।

नोटिफिकेशन के अनुसार, गणनाकर्मी घर-घर जाकर यह सुनिश्चित करेंगे कि मकान का उपयोग किस उद्देश्य के लिए हो रहा है केवल रहने के लिए, दुकान के साथ रहने के लिए या पूरी तरह व्यावसायिक कार्य के लिए।

इसमें मकान की दीवार, छत और फर्श में इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री (जैसे पत्थर, ईंट, कंक्रीट या कच्ची सामग्री) का विवरण भी दर्ज किया जाएगा ताकि देश के हाउसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का सटीक आकलन किया जा सके।

​33 सवालों की विस्तृत सूची: आपसे क्या-क्या पूछा जाएगा?

​इस बार की जनगणना में पूछे जाने वाले 33 सवालों को बेहद बारीकी से तैयार किया गया है। इसमें परिवार के मुखिया की जानकारी से लेकर घर की सूक्ष्म सुविधाओं तक को शामिल किया गया है। सवालों की सूची इस प्रकार है:-

 ​मकान और परिवार का ढांचा

1. भवन संख्या।

2. ​जनगणना मकान संख्या।

3. ​मकान की छत, दीवार और फर्श की सामग्री।

4. ​मकान का उपयोग (आवासीय या अन्य)।

5. ​मकान की वर्तमान स्थिति।

6. ​परिवार नंबर।

7. ​कुल सदस्यों की संख्या।

8. ​परिवार के मुखिया का नाम।

9. ​मुखिया का लिंग।

10. ​मुखिया की जाति (SC/ST)।

11. ​मुखिया की वैवाहिक स्थिति।

12. ​मुखिया की शिक्षा का स्तर।

​बुनियादी सुविधाएं और जीवन स्तर

13. रहने के कमरों की संख्या।

14. विवाहित जोड़ों की संख्या।

15. पीने के पानी का मुख्य स्रोत।

16. पीने के पानी की सुलभता (घर के अंदर या बाहर)।

17. रोशनी का मुख्य स्रोत (बिजली आदि)।

18. शौचालय की उपलब्धता और प्रकार।

19. गंदे पानी की निकासी (ड्रेनेज)।

20. बाथरूम/स्नानगृह की सुविधा।

21. रसोई घर की उपलब्धता।

22. खाना पकाने के लिए उपयोग होने वाला ईंधन।

23. मुख्य रूप से खाया जाने वाला अनाज।

​आधुनिक संपत्तियां और डिजिटल संसाधन

24. रेडियो/ट्रांजिस्टर की उपलब्धता।

25. टेलीविजन।

26. इंटरनेट कनेक्शन की सुविधा।

27. लैपटॉप या कंप्यूटर।

28. टेलीफोन/मोबाइल/स्मार्टफोन।

29. साइकिल।

30. स्कूटर/मोटर साइकिल/मोपेड।

31. कार/जीप/वैन।

32. संपर्क के लिए मोबाइल नंबर।

33. क्या परिवार के पास अपना अन्य घर है?

​कागजों की जगह मोबाइल ऐप: पहली बार पूर्ण डिजिटल जनगणना

​सरकार ने इस बार पारंपरिक कागजी रजिस्टर को छोड़कर पूरी तरह डिजिटल माध्यम अपनाने का निर्णय लिया है। जनगणना के कार्य में लगे गणनाकर्मी अपने मोबाइल फोन या टैबलेट पर विशेष रूप से तैयार 'सेंसस ऐप' का उपयोग करेंगे।

इस तकनीक का लाभ यह होगा कि डेटा रियल-टाइम में सेंट्रल सर्वर पर अपडेट होगा, जिससे मानवीय गलतिया कम होंगी और नतीजों के विश्लेषण में बरसों का समय नहीं लगेगा। नागरिकों के पास 'सेल्फ-एन्यूमेरेशन' का विकल्प भी उपलब्ध कराया जा सकता है।

2027 की समय सीमा और जनगणना का महत्व

​कोविड-19 के कारण देरी से हो रही यह जनगणना 2027 में जमीन पर उतरेगी। इसके माध्यम से प्राप्त आंकड़े न केवल देश की जनसंख्या वृद्धि की दर बताएंगे, बल्कि यह भी स्पष्ट करेंगे कि पिछले डेढ़ दशक में भारतीय परिवारों के जीवन स्तर और डिजिटल पहुंच में कितना बदलाव आया है।

इन्हीं आंकड़ों के आधार पर आगामी परिसीमन और महिलाओं के लिए आरक्षण जैसी महत्वपूर्ण वैधानिक प्रक्रियाओं को लागू करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

डेटा की सटीकता और भविष्य की योजनाओं का रोडमैप

​यह जनगणना केवल लोगों की गिनती नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक-आर्थिक सर्वे है। घर में शौचालय, पानी और बिजली जैसी सुविधाओं के डेटा से यह पता चलेगा कि 'उज्ज्वला' और 'नल से जल' जैसी सरकारी योजनाओं का धरातल पर कितना असर हुआ है।

मोबाइल, इंटरनेट और लैपटॉप से जुड़े सवाल यह दर्शाएंगे कि भारत 'डिजिटल इंडिया' की राह पर कितना आगे बढ़ा है। यह डेटा देश की आगामी पंचवर्षीय योजनाओं और बजट आवंटन के लिए सबसे विश्वसनीय दस्तावेज होगा।

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