Secondary Hypertension: क्या होता है सेकेंडरी हाइपरटेंशन, किस तरह इस पर पा सकते हैं काबू?

Secondary Hypertension: सेकेंडरी हाइपरटेंशन को समय पर पहचान कर उसे कंट्रोल करना जरूरी है। जानते हैं आखिर क्या है ये स्थिति और इसे कैसे कंट्रोल करें।

Updated On 2026-02-06 12:11:00 IST

सेकेंडरी हाइपरटेंशन से बचाव के तरीके।

Secondary Hypertension: आजकल हाई ब्लड प्रेशर की समस्या आम होती जा रही है, लेकिन हर हाई बीपी एक-सा नहीं होता। ज्यादातर लोग प्राइमरी हाइपरटेंशन के बारे में जानते हैं, मगर सेकेंडरी हाइपरटेंशन एक ऐसी स्थिति है, जो किसी दूसरी बीमारी या मेडिकल कारण की वजह से होती है। यही कारण है कि कई बार दवाइयों के बावजूद ब्लड प्रेशर कंट्रोल नहीं हो पाता।

सेकेंडरी हाइपरटेंशन को समय रहते पहचान लिया जाए, तो इसे जड़ से कंट्रोल किया जा सकता है। सही जांच, इलाज और लाइफस्टाइल में बदलाव से इस गंभीर समस्या पर काबू पाना संभव है। आइए विस्तार से समझते हैं कि सेकेंडरी हाइपरटेंशन क्या है और इससे कैसे निपटा जाए।

सेकेंडरी हाइपरटेंशन क्या होता है

सेकेंडरी हाइपरटेंशन वह स्थिति है, जिसमें ब्लड प्रेशर बढ़ने की वजह कोई स्पष्ट मेडिकल कारण होता है। यह समस्या किडनी डिजीज, हार्मोनल गड़बड़ी, थायरॉइड, एड्रिनल ग्लैंड की समस्या या कुछ दवाइयों के सेवन से हो सकती है। इस तरह का हाई बीपी अचानक शुरू होता है और अक्सर ज्यादा गंभीर होता है।

सेकेंडरी हाइपरटेंशन के प्रमुख कारण

इस समस्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं। किडनी से जुड़ी बीमारियां, जैसे क्रॉनिक किडनी डिजीज या रीनल आर्टरी स्टेनोसिस, इसके बड़े कारण हैं। इसके अलावा हार्मोनल डिसऑर्डर, नींद में सांस रुकना, गर्भनिरोधक गोलियां, स्टेरॉयड और दर्द निवारक दवाइयों का लंबे समय तक इस्तेमाल भी ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है।

सेकेंडरी हाइपरटेंशन के लक्षण

अक्सर इसके लक्षण सामान्य हाई बीपी जैसे ही होते हैं, लेकिन कुछ मामलों में तेज सिरदर्द, चक्कर आना, सीने में दर्द, सांस फूलना और नजर धुंधली होना शामिल है। खास बात यह है कि दवाइयों से भी बीपी कंट्रोल न होना इसका बड़ा संकेत हो सकता है।

जांच और पहचान की विधि

सेकेंडरी हाइपरटेंशन की पहचान के लिए डॉक्टर ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, किडनी फंक्शन टेस्ट, हार्मोन लेवल जांच और इमेजिंग टेस्ट की सलाह देते हैं। सही कारण पता चलना इलाज का सबसे अहम हिस्सा होता है।

सेकेंडरी हाइपरटेंशन पर काबू पाने के तरीके

इस समस्या का इलाज कारण पर निर्भर करता है। अगर किडनी या हार्मोनल समस्या है, तो उसका इलाज जरूरी होता है। साथ ही नमक का सेवन कम करना, वजन कंट्रोल में रखना, नियमित व्यायाम, शराब और धूम्रपान से दूरी बनाना बेहद जरूरी है। डॉक्टर की सलाह से दवाइयों में बदलाव भी किया जाता है।

इलाज में सहायक सामग्री की लिस्ट

  • ब्लड प्रेशर मॉनिटर
  • कम नमक वाला आहार
  • ताजे फल और सब्जियां
  • नियमित दवाइयां
  • मेडिकल जांच रिपोर्ट्स

क्यों जरूरी है समय पर इलाज

सेकेंडरी हाइपरटेंशन को नजरअंदाज करने से हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी फेल्योर का खतरा बढ़ सकता है। समय रहते सही इलाज से इन जटिलताओं से बचा जा सकता है।

(Disc।aimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी डॉक्टर/विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।)

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