Gold-Silver ETF में बड़ी गिरावट: फिजिकल कीमतों से ज्यादा गिरावट क्यों आई? निवेशकों को घबराने की जरूरत क्यों नहीं
Gold-Silver ETF downfall: गोल्ड और सिल्वर ETF में तेज गिरावट आई जबकि एसीएक्स और फ्यूचर्स में भाव इतने टूटे नहीं। मुनाफावसूली और वोलैटिलिटी से ईटीएफ कीमतें फिजिकल मार्केट के करीब आईं हैं और एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ये अस्थायी करेक्शन है।
gold-silver etf crash: गोल्ड और सिल्वर ETF में तेज गिरावट के क्या मायने हैं।
Gold-Silver ETF downfall: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में तेज गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों के बीच हलचल मच गई। खास बात यह रही कि ईटीएफ की कीमतों में गिरावट फिजिकल और फ्यूचर्स मार्केट के मुकाबले कहीं ज्यादा रही। हालांकि बाजार विशेषज्ञ इसे अस्थायी करेक्शन बता रहे और निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं मानते।
गोल्ड ईटीएफ की बात करें तो बीएसएल गोल्ड ईटीएफ सबसे ज्यादा 9.53% टूट गया। इसके बाद टाटा गोल्ड ईटीएफ में 8.54% और एक्सिस गोल्ड ईटीएफ में 8.47% की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, सिल्वर ETF में गिरावट और ज्यादा रही। टाटा सिल्वर ईटीएफ 13.6% लुढ़क गया, सिल्वर प्राइस ईटीएफ 11.18%, Edelweiss सिल्वर ईटीएफ 9.62% नीचे आ गया। यानी कीमती धातुओं से जुड़े लगभग सभी ईटीएफ में जोरदार बिकवाली दिखी।
इसके उलट फ्यूचर्स मार्केट में गिरावट सीमित रही। एमसीएक्स पर फरवरी गोल्ड फ्यूचर्स सिर्फ 0.77% और मार्च सिल्वर फ्यूचर्स 1.2% फिसले। दोपहर करीब 3 बजे गोल्ड का भाव 151557 रुपये प्रति 10 ग्राम था और सिल्वर का 319843 रुपये दर्ज किया गया।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ईटीएफ में 20% तक की गिरावट ने कीमतों को घरेलू फिजिकल और इंटरनेशनल मार्केट के करीब ला दिया। उन्होंने बताया कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों में थोड़ी नरमी, मुनाफावसूली और निवेशकों का अस्थिर मेटल्स से दूरी बनाना इसकी बड़ी वजह।
Stockify के सीईओ पियूष झुनझुनवाला कहते हैं कि यह गिरावट स्थायी नुकसान का संकेत नहीं, बल्कि शॉर्ट टर्म वोलैटिलिटी है। तेज रैली के बाद ऐसे करेक्शन आम हैं, खासकर कमोडिटी से जुड़े निवेशों में, जहां भाव भावनाओं और ग्लोबल संकेतों पर तेजी से बदलते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक ईटीएफ और फिजिकल गोल्ड-सिल्वर एक जैसे नहीं होते। स्थिर बाजार में ये करीब-करीब ट्रैक करते हैं लेकिन तेज उतार-चढ़ाव के समय ईटीएफ ओवरशूट कर जाते हैं। खासतौर पर जिन निवेशकों ने पिछले 6-8 महीनों में प्रीमियम पर ईटीएफ खरीदे थे, उनके लिए यह गिरावट कीमतों के रैशनलाइज होने जैसी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ETF स्थिरता का भ्रम पैदा करते हैं। असल जोखिम तब होता है जब निवेश बिना स्पष्ट उद्देश्य और एंट्री-एग्जिट प्लान के किया जाए।
एक्सपर्ट्स की सलाह है कि गोल्ड और सिल्वर में निवेश लंबी अवधि के नजरिए से करें। सिल्वर ईटीएफ में STP के जरिए निवेश बेहतर है, जबकि गोल्ड पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन के लिए अहम बना रहेगा। दोनों मेटल्स मिलाकर निवेश 10% से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
(प्रियंका कुमारी)