गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में बड़ी गिरावट: रिकॉर्ड तेजी के बाद 21% तक टूटे भाव, क्या अभी खरीदने का सही वक्त?

Gold-silver ETFs crash: रिकॉर्ड तेजी के बाद गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में गुरुवार को करीब 21 फीसदी की तेज गिरावट दर्ज की गई। टैरिफ और जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने से सेफ-हेवन मांग घटी।

Updated On 2026-01-22 15:13:00 IST

Gold-silver ETFs crash: सोना और चांदी आधारित ईटीएफ में जोरदार गिरावट देखने को मिली। 

Gold-silver ETFs crash: रिकॉर्ड तेजी के बाद अब सोना और चांदी आधारित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में जोरदार गिरावट देखने को मिली। 22 जनवरी को गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ बुरी तरह फिसले, जिससे निवेशकों में हलचल मच गई। टाटा सिल्वर ईटीएफ दिन के निचले स्तर पर करीब 21 फीसदी तक टूट गया जबकि बिड़ला सन लाइफ गोल्ड ईटीएफ में करीब 12 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, हालांकि बाद में कुछ रिकवरी दिखी।

यह गिरावट सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना-चांदी की कीमतों में आई कमजोरी का असर। इससे पहले भू-राजनीतिक तनाव और टैरिफ की आशंकाओं के चलते इन कीमती धातुओं में रिकॉर्ड उछाल देखा गया था।

क्यों गिरे सोना-चांदी ईटीएफ?

विशेषज्ञों के मुताबिक गिरावट की सबसे बड़ी वजह वैश्विक माहौल में अचानक आया बदलाव है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए कि नाटो के साथ ग्रीनलैंड को लेकर एक समझौते की रूपरेखा बन गई और 1 फरवरी से लगने वाले टैरिफ अब नहीं लगाए जाएंगे। इसके अलावा ट्रंप ने यह भी साफ किया कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए सैन्य बल का इस्तेमाल नहीं करेगा।

इन बयानों के बाद वैश्विक बाजारों में तनाव कम हुआ और निवेशकों का रुझान फिर से जोखिम वाले एसेट्स की तरफ बढ़ा। इसका सीधा असर सेफ-हेवन माने जाने वाले सोना और चांदी पर पड़ा।

VT मार्केट के सीनियर एनालिस्ट जस्टिन खू के मुताबिक, 'यह गिरावट किसी बड़े फंडामेंटल ब्रेकडाउन का संकेत नहीं है, बल्कि मुनाफावसूली और पोर्टफोलियो री-बैलेंसिंग का नतीजा है।'

अब निवेशक क्या करें?

बाजार जानकारों की राय इस पर बंटी हुई है। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबी अवधि के लिहाज से सोना-चांदी के फंडामेंटल अभी भी मजबूत हैं। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और AI इंफ्रास्ट्रक्चर से चांदी की मांग बनी हुई है। वहीं सोना अभी भी जियोपॉलिटिकल जोखिमों के खिलाफ मजबूत हेज है। हालांकि वह चेतावनी देती हैं कि इतनी तेज तेजी के बाद एकमुश्त निवेश करना जोखिम भरा हो सकता। बेहतर होगा कि निवेशक धीरे-धीरे, चरणों में खरीदारी करें।

कंजर्वेटिव निवेशकों के लिए विशेषज्ञ 5 से 10 फीसदी पोर्टफोलियो गोल्ड और सिल्वर ETFs में SIP या सिस्टमेटिक तरीके से लगाने की सलाह दे रहे हैं, ताकि टाइमिंग का जोखिम कम हो।

क्या आगे और उतार-चढ़ाव आएगा?

विशेषज्ञ मानते हैं कि शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बनी रह सकती। बजट से जुड़ी उम्मीदों और सेंटिमेंट के चलते खासतौर पर चांदी में तेज हलचल संभव है। लेकिन लंबी अवधि में सेंट्रल बैंक की खरीद, महंगाई का डर और वैश्विक अनिश्चितता सोना-चांदी को सपोर्ट देती रहेगी।

(प्रियंका कुमारी)

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