Meesho share Price: मीशो में लगातार दो दिन लगा ओअर सर्किट, 40 हजार करोड़ रुपए डूबे, निवेशकों का टूटा भरोसा
मीशो के शेयरों में लगातार लोअर सर्किट लगने से निवेशकों में चिंता बढ़ गई है। जानिए शेयर गिरने के पीछे की वजहें, मैनेजमेंट बदलाव और निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है।
मीशो के शेयर में लगातार दो दिन ओअर सर्किट लगने से निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है।
Meesho share fall: ई-कॉमर्स सेक्टर की जानी-मानी कंपनी मीशो के शेयरों में आई तेज गिरावट ने बाजार में हलचल मचा दी है। कंपनी के मार्केट कैप में से करीब 40,000 करोड़ रुपए साफ हो गए हैं। लगातार दो कारोबारी दिनों तक शेयरों का लोअर सर्किट पर बंद होना इस बात का संकेत है कि फिलहाल निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है। जब किसी स्टॉक में बार-बार लोअर सर्किट लगता है, तो इसका मतलब यह होता है कि बाजार में बिकवाली का दबाव इतना ज्यादा है कि खरीदार सामने नहीं आ पा रहे हैं। ऐसे हालात में निवेशक जोखिम से दूरी बनाना ही बेहतर समझते हैं। मीशो के शेयरों पर बने इस दबाव के पीछे दो बड़ी वजहें हैं। पहली वजह शेयरों का लॉक-इन पीरियड खत्म होना है। आईपीओ के बाद कंपनी के कुछ शुरुआती निवेशकों और कर्मचारियों को तय समय तक अपने शेयर बेचने की अनुमति नहीं होती।
दो वजहों से शेयरों पर बना दबाव
जैसे ही लॉक इन अवधि समाप्त होती है, बाजार को यह आशंका सताने लगती है कि अब बड़ी मात्रा में शेयर बिक सकते हैं। भले ही सभी निवेशक तुरंत बिक्री न करें, पर केवल इस संभावना से ही बाजार में नकारात्मक माहौल बन जाता है और शेयर की कीमत पर असर पड़ता है। दूसरी वजह कंपनी के सीनियर मैनेजमेंट से जुड़ा बदलाव है। जनरल मैनेजर (बिजनेस) के इस्तीफे की खबर सामने आते ही निवेशकों के मन में कई तरह के सवाल उठने लगे। आमतौर पर माना जाता है कि किसी तेजी से बढ़ती कंपनी में वरिष्ठ स्तर पर बदलाव भविष्य की रणनीति या आंतरिक चुनौतियों की ओर इशारा कर सकता है। इसी आशंका के चलते निवेशक सतर्क हो जाते हैं और कई बार मुनाफावसूली का रास्ता अपनाते हैं। इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर उन निवेशकों पर पड़ा है, जिन्होंने ऊंचे भाव पर शेयर खरीदे थे।
शेयरों में रिकार्ड स्तर से बड़ी गिरावट
रिकॉर्ड स्तर से तुलना करें तो स्टॉक में अच्छी-खासी गिरावट आ चुकी है, जिससे बाजार पूंजीकरण में हजारों करोड़ रुपये की कमी देखी गई है। हालांकि, यह भी सच है कि मीशो ने ऑपरेशनल स्तर पर कई सकारात्मक कदम उठाए हैं। लॉजिस्टिक्स लागत में कटौती, कैश-ऑन-डिलीवरी ऑर्डर्स में कमी और अपने इन-हाउस डिलीवरी सिस्टम को मजबूत करना कंपनी की ताकत को दर्शाता है। इसके बावजूद शेयर बाजार सिर्फ मौजूदा प्रदर्शन नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं और वैल्यूएशन को भी ध्यान में रखता है। कुछ निवेशकों को यह महसूस हुआ कि समान कंपनियों के मुकाबले मीशो का मूल्यांकन ज्यादा है, इसलिए उन्होंने मुनाफा निकालना ही सही समझा। यही वजह है कि मजबूत कारोबारी सुधारों के बावजूद शेयरों में दबाव देखने को मिला। अब निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले समय में कंपनी भरोसा कैसे बहाल करती है।